ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने गोमाता के मुद्दे को लंबे समय तक केवल राजनीतिक लाभ के रूप में इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यदि वास्तव में गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मंशा होती, तो अब तक इस दिशा में प्रभावी और ठोस पहल देखने को मिलती। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर जनसमर्थन हासिल करना और उसे राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए वास्तविक प्रयास करना—दो अलग बातें हैं।
वर्तमान सरकार से बहुत अधिक अपेक्षा नहीं
सिकंदरा के नीरव कुंज में आयोजित गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा संवाद कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बातें कहीं। यह आयोजन Akhil Bharatiya Hindu Mahasabha द्वारा किया गया था।
शंकराचार्य ने कहा कि गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने का प्रयास किसी एक संगठन या व्यक्ति के बूते संभव नहीं है। इसके लिए व्यापक सामाजिक भागीदारी जरूरी है, जिसमें युवाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक यह मांग जनआंदोलन का रूप नहीं लेती, तब तक इसके सफल होने की संभावना सीमित रहेगी। साथ ही उन्होंने मौजूदा सरकार से अधिक उम्मीद न रखने की बात भी कही। कार्यक्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल
इसी दौरान उन्होंने अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि ट्रस्ट की संरचना और कार्यशैली पर सवाल उठते हैं और इसे लेकर पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से पहले भूमि खरीद से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की बातें सामने आई थीं और ट्रस्ट गठन में पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं की अनदेखी की गई।
गविष्टि यात्रा का भव्य स्वागत, विविध समुदायों की भागीदारी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय गविष्टि यात्रा का सोमवार को आवास विकास कॉलोनी स्थित सेंट्रल पार्क में जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गोभक्त और संत समाज के लोग मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि इसमें मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी देखने को मिली।
गो-रक्षा को सामाजिक मुद्दा बताया
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के समर्थन में पोस्टर प्रदर्शित किए और इसे सामाजिक समरसता तथा राष्ट्रीय एकता से जोड़कर प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि गो-रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती से भी जुड़ा विषय है।
प्राचीन कैलाश मंदिर के महंत गौरव गिरी, महंत सुभाष गिरी और रावली मंदिर के महंत अभिषेक कृष्ण पाराशर सहित कई संतों ने इसे सनातन परंपरा और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने वाला अभियान बताया। कार्यक्रम में सैफ अली अब्बास, सलमान कुरैशी, संजय यादव, अमित जादौन और राहुल चतुर्वेदी सहित कई लोग मौजूद रहे। संयोजक डॉ. मदन मोहन शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
ब्रह्मलीन संत की जीवनी का विमोचन
यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘देदीप्यमान द्विपीठाधीश्वर’ का विमोचन भी किया। पुस्तक की लेखिका डॉ. दीपिका उपाध्याय ने बताया कि एक संत के विराट व्यक्तित्व को सीमित शब्दों में समेटना चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने कहा कि एक संन्यासी का जीवन जितना उनके तप और त्याग से भरा होता है, उतना ही महत्वपूर्ण उनके पीछे परिवार और विशेषकर माता का मौन समर्पण भी होता है।