इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में नवंबर 2024 की हिंसा मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के सीजेएम कोर्ट के आदेश पर रोक को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। यह निर्णय न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने सुनाया।

संभल की जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के मामले में सीजेएम कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, पूर्व थानेदार अनुज तोमर सहित 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अनुज चौधरी और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

10 फरवरी को हाईकोर्ट ने पहले ही सीजेएम के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च के लिए तय थी, लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने रोक के आदेश को अगले आदेश तक बढ़ा दिया

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को इस पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई की तिथि 21 अप्रैल निर्धारित की।

मामला क्या है

शिकायतकर्ता यामीन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि 24 नवंबर 2024 को सुबह लगभग 8:45 बजे उनका बेटा आलम, संभल के मोहल्ला कोट क्षेत्र में जामा मस्जिद के पास अपनी ठेली पर रस्क और बिस्कुट बेच रहा था। इसी दौरान नामजद पुलिस अधिकारियों ने भीड़ पर जान से मारने की नीयत से अचानक गोलियां चला दी।

याचिका में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और संभल कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर का नाम शामिल था।

सीजेएम सुधीर ने अपने 11 पृष्ठ के आदेश में कहा था कि पुलिस अपने आधिकारिक कर्तव्यों का बहाना बनाकर अपराध नहीं कर सकती। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति पर गोली चलाना आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं माना जा सकता। प्रथम दृष्टया, यह संज्ञेय अपराध प्रतीत होता है और इसकी सच्चाई का पता केवल उचित जांच के माध्यम से ही लगाया जा सकता है।