बरेली: निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को शामली के जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा आरोप पत्र सौंपा जाएगा। यह आरोप पत्र पहले बरेली जिला प्रशासन ने तैयार किया था, जिसे शासन ने मंजूरी देते हुए मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी के पास भेजा। अब मंडलायुक्त इसे अलंकार की वर्तमान तैनाती स्थल शामली के जिलाधिकारी को भेजेंगे।

गणतंत्र दिवस के दिन इस्तीफा और निलंबन

गणतंत्र दिवस के दिन दोपहर में अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर हुई पिटाई से आहत होने का कारण बताया। इसके तुरंत बाद प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अगले दिन अलंकार और उनके समर्थकों का प्रदर्शन सिटी मजिस्ट्रेट आवास से लेकर कलक्ट्रेट तक दिनभर जारी रहा, जिसकी वीडियोग्राफी जिला प्रशासन ने कर शासन को भेजी।

अलंकार पर लगे आरोप

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अलंकार पर आरोप है कि उन्होंने इस्तीफा स्वीकार होने से पहले जातिगत, धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी कर सरकारी नियमावली का उल्लंघन किया। उन्होंने अनुमति के बिना भीड़ जुटाकर धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की, जिससे लोक शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित हुई।

मंडलायुक्त भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि शासन स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद आरोप पत्र शामली के जिलाधिकारी को भेजा जाएगा। जिलाधिकारी इसे अलंकार को सुपुर्द करेंगे। अलंकार के जवाब और घटनाओं से संबंधित सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ अलंकार की मुखर प्रतिक्रिया

निलंबन के छह दिन बाद, मंगलवार को देर शाम अलंकार अग्निहोत्री बरेली लौटे। लाल फाटक रोड स्थित परशुराम धाम पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया और जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान अलंकार ने एससी-एसटी एक्ट को काला कानून करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि यह कानून 6 फरवरी तक वापस नहीं लिया गया, तो वे 7 फरवरी को दिल्ली के लिए पैदल कूच करेंगे।

अलंकार ने यूजीसी की नई नियमावली को केंद्र सरकार की साजिश बताया और कहा कि इसमें विभिन्न वर्गों को लड़ाने वाले प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ भी टिप्पणियां की।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने यूजीसी रेगुलेशन एक्ट के माध्यम से देश की आत्मा पर हमला किया है। उनका मानना है कि सरकार अल्पमत में है और अगर चुनाव अभी हुए तो ruling पार्टी को शून्य सीटें मिलेंगी। अलंकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि एससी-एसटी एक्ट के मामलों में बिना जांच एफआईआर या गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन सेक्शन-18ए जोड़कर आदेश को निष्प्रभावी बना दिया गया।