शामली के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र में कक्षा 12 की छात्रा के साथ छेड़छाड़ और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने के गंभीर मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट)-1 की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने आरोपी आकाश कौशिक को आजीवन कारावास की सजा दी है।
यह मामला 17 अगस्त 2017 की उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जब पीड़िता ने घर में केरोसिन डालकर खुद को आग लगा ली थी। गंभीर रूप से झुलसी छात्रा ने बाद में उपचार के दौरान 19 अगस्त को मेरठ में दम तोड़ दिया था।
घटना के बाद पीड़िता की मां ने आकाश कौशिक और शुभम नामक दो युवकों के खिलाफ छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के दौरान पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा भी जोड़ी और दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
अदालत में मृत्युपूर्व बयान बना अहम सबूत
सुनवाई के दौरान पीड़िता द्वारा मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान को अदालत ने सबसे अहम साक्ष्य माना। इसी बयान के आधार पर आकाश कौशिक को दोषी ठहराया गया, जबकि दूसरे आरोपी शुभम को पर्याप्त सबूत न मिलने पर बरी कर दिया गया।
अदालत ने आकाश कौशिक को छेड़छाड़ के मामले में पांच साल की सजा और 70 हजार रुपये जुर्माने के साथ-साथ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत की टिप्पणी
फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी ने लगातार पीड़िता का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया, उसे ब्लैकमेल किया और ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जिनके चलते नाबालिग छात्रा ने आत्मघाती कदम उठाया। अदालत ने यह भी माना कि मृत्युपूर्व बयान स्पष्ट, स्वैच्छिक और विश्वसनीय है, जो दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार है।
बयान में पीड़िता ने क्या कहा था
मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान में पीड़िता ने बताया था कि वह आकाश को जानती थी और उनकी पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। उसने यह भी कहा था कि आरोपी उसका लगातार पीछा करता था और परेशान करता था, यहां तक कि जन्मदिन के दिन भी उसका पीछा किया गया।
पीड़िता ने बयान में यह भी कहा था कि वह दोबारा जीवन शुरू करना चाहती थी, लेकिन मानसिक प्रताड़ना के कारण वह टूट गई और आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो गई।