हाथरस की एसीजेएम एमपी/एमएलए कोर्ट में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने संज्ञान के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह तय किया जाएगा कि राहुल गांधी को इस मामले में तलब किया जाए या नहीं।
मामले में राहुल गांधी की ओर से दाखिल आपत्ति पर भी सुनवाई होनी थी, जिस पर बहस पूरी नहीं हो सकी। कोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख तय की है।
यह मामला चंदपा थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है, जहां 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ हुई घटना ने व्यापक सुर्खियां बटोरी थीं। इस केस में 2 मार्च 2023 को अदालत का फैसला आया था, जिसमें एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि तीन अन्य को बरी कर दिया गया था।
इसके बाद 12 दिसंबर 2024 को राहुल गांधी पीड़िता के परिवार से मिलने गांव पहुंचे थे। आरोप है कि दोषमुक्त किए गए युवकों के खिलाफ उन्होंने सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की और अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर भी पोस्ट साझा किया, जिसमें अपराधियों के खुले घूमने की बात कही गई थी। इसी बयान को लेकर एक आरोपी ने आपत्ति जताते हुए मानहानि का दावा किया और 50 लाख रुपये का मुआवजा मांगा।
आरोपी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस का जवाब न मिलने पर 24 जनवरी 2025 को अदालत में मानहानि का परिवाद दाखिल किया गया।
इससे पहले 16 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से लखनऊ के अधिवक्ताओं ने आपत्ति दाखिल करते हुए मामले को खारिज करने की मांग की थी। इसके बाद 13 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन वह नहीं हो सकी और मामला 2 मई को सूचीबद्ध किया गया।
शनिवार को हुई सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से तीन अधिवक्ता अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने अपनी दलीलों में कहा कि दिया गया बयान गलत नहीं था और यह उनके लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कर्तव्यों का हिस्सा था। उन्होंने यह भी कहा कि वही बात बाद में उनके एक्स अकाउंट पर साझा की गई थी।