अयोध्या के जीएसटी उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा तीन दिन बाद शासन तक पहुँच गया। अपने इस्तीफे में उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर समाज में तनाव फैलाने और नकारात्मक माहौल बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका त्यागपत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में है और यह इसलिए दिया गया क्योंकि वे केवल वेतन पाने वाले रोबोट नहीं हैं, जो अपमानजनक टिप्पणियों को सहन करते रहें।

प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल के नाम लिखे पत्र में कहा कि शंकराचार्य भोले-भाले अधिकारियों को प्रलोभन देकर सरकार के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं और जातिवाद फैलाकर प्रदेश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि वे संवेदनशील सरकारी अधिकारी हैं और प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई अनुचित टिप्पणी होने पर उन्हें आहत होना स्वाभाविक है।

इसी बीच, प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी पाने के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है। सीएमओ और स्वास्थ्य महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में यदि यह पाया गया कि उन्होंने गलत सर्टिफिकेट का उपयोग कर नौकरी हासिल की है, तो यह मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के अधिकार क्षेत्र में जाएगा और आयोग की राय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शासन ने पूरी घटना की रिपोर्ट भी मांगी है और पैनल के माध्यम से मामले की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी।