अयोध्या। जिले के कारागार से बुधवार देर रात दो बंदियों के फरार होने के मामले में जेलर जितेंद्र कुमार यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी और आठ बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। जेल अधीक्षक के निलंबन की सूचना भी मिली है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

कैसे हुआ फरार होना
जानकारी के अनुसार, दोनों बंदियों ने विशेष सुरक्षा बैरक (तन्हाई) की खिड़की तोड़कर वहां से नीचे लगी ईंटों को हटाया और खुले परिसर में पहुंचे। इसके बाद गोशाला की ओर से दीवार फांदकर जेल से बाहर निकल गए। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि वे पोस्टमार्टम हाउस की ओर बनी मुख्य दीवार को पार कर गए होंगे। फरारी के लिए बंदियों ने अपने कंबल और कपड़ों का रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया।

फरार बंदियों की पहचान
भागने वालों में सुलतानपुर के करौंधी कला अमरे मऊ निवासी शेर अली और अमेठी के मुसाफिर खाना निवासी सूरज उर्फ गोलू अग्रहरि शामिल हैं। शेर अली चोरी के आरोप में 28 नवंबर 2024 से और गोलू अग्रहरि एससी/एसटी एवं पोक्सो एक्ट के तहत 14 सितंबर 2025 से जेल में बंद थे। दोनों की निगरानी के लिए उन्हें विशेष सुरक्षा बैरक में रखा गया था।

डीआइजी ने जांच शुरू की
जेल प्रशासन को सुबह इस घटना की जानकारी मिली और डीआइजी जेल एसके मैत्रेय मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि मामले की विस्तृत जांच चल रही है और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुराने मुकदमे और गंभीर आरोप
गोलू अग्रहरि पर गत 31 अगस्त इनायतनगर क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने का मामला दर्ज है। वहीं, शेर अली पर अवैध हथियार रखने और गुंडा एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। दोनों बंदियों के फरार होने के मामले में कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

यह घटना जेल सुरक्षा की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है। 2012 में भी एक बंदी कारागार से फरार हो चुका था, जिसे बाद में पकड़ लिया गया था।