होली की छुट्टियों के बाद राजधानी लखनऊ से दिल्ली और मुंबई लौटने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। रेलवे स्टेशनों पर भीड़ का आलम यह है कि लंबी वेटिंग के चलते यात्री इमरजेंसी कोटे की सीटों का सहारा लेने को मजबूर हैं। इस दौरान कुछ यात्रियों ने सांसद और विधायकों के लेटरहेड के जरिए सिफारिश करवाई, ताकि उनकी सीटें सुनिश्चित हो सकें।

सुकांत मिश्र, जो पेशे से इंजीनियर हैं, को होली के बाद लखनऊ से मुंबई जाना था। पुष्पक एक्सप्रेस की थर्ड एसी में उनकी टिकट वेटिंग में थी। उन्होंने अपने बॉस के माध्यम से सांसद से सिफारिश करवाई और डीआरएम कार्यालय में आवेदन जमा कराया। इसी तरह रीना शुक्ल अपने पति के साथ लखनऊ से काठगोदाम जाने वाली बाघ एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थीं। उन्होंने विधायक के करीबी के जरिए सीट सुनिश्चित करवाई।

उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के डीआरएम कार्यालय में इमरजेंसी कोटे के तहत सांसद, विधायक, मरीज और अन्य जरूरतमंदों के लिए सीटें सुरक्षित रहती हैं। होली के बाद लौटने वाले यात्रियों के लिए यह कोटा किसी वरदान से कम नहीं, क्योंकि प्रमुख ट्रेनों जैसे लखनऊ मेल, एसी एक्सप्रेस, तेजस, पुष्पक, गोरखपुर पनवेल और अवध एक्सप्रेस में वेटिंग सौ से अधिक हो चुकी है। इस कारण यात्रियों को तुरंत कन्फर्म सीट मिलना मुश्किल हो गया है।

शुक्रवार-सोमवार के दौरान तत्काल कोटे के लिए यात्री बुकिंग कराने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन उनकी उम्मीदें अधिकतर धरी की धरी रह गईं। लखनऊ से दिल्ली व मुंबई रूट पर 250 से अधिक सीटें खाली होने के बावजूद यात्रियों को सिर्फ 52 सीटें ही मिलीं। शेष सीटों पर दलालों और सिफारिशों के जरिए कब्जा हो गया।

विशेष रूप से वीआईपी ट्रेनों में इमरजेंसी कोटे की मांग सबसे अधिक रहती है। उदाहरण के लिए पुष्पक एक्सप्रेस में थर्ड एसी के लिए 12–15 सीटें इमरजेंसी कोटे में होती हैं, लेकिन इसके लिए 150 से अधिक यात्रियों ने आवेदन कर रखा है। इसी तरह लखनऊ मेल में 175 और एसी एक्सप्रेस में 120 यात्री इमरजेंसी कोटे के लिए आवेदन कर चुके हैं।

यात्रियों का कहना है कि ऐसे समय में रेलवे को अधिक इमरजेंसी कोटे या अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि छुट्टियों के बाद घर लौटने वाले यात्रियों को परेशानी न हो।