जर्मनी सरकार ने 17 से 45 साल के पुरुषों के लिए विदेश यात्रा के नियमों में नई पाबंदी लागू कर दी है। अब इस आयु वर्ग के पुरुषों को तीन महीने से अधिक समय के लिए किसी भी देश की यात्रा करने से पहले बुंडेसवेहर यानी जर्मन सेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है।
पहले यह नियम केवल आपातकाल या युद्ध जैसी परिस्थितियों में लागू होता था, लेकिन अब इसे सामान्य हालात में भी लागू किया गया है। नए प्रावधान के अनुसार, अगर कोई पुरुष पढ़ाई, नौकरी या किसी अन्य कारण से तीन महीने से अधिक विदेश जाना चाहता है, तो उसे सेना से आधिकारिक मंजूरी लेनी होगी। अनुमति बुंडेसवेहर के करियर सेंटर द्वारा जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर योग्य युवा सैनिकों की जानकारी और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित रहे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सैन्य मजबूती और तैयारी के लिए उठाया गया है। वर्तमान में जर्मनी की सेना में लगभग 1.84 लाख सैनिक हैं और योजना है कि 2035 तक इसे 2.55 से 2.70 लाख तक बढ़ाया जाए। इस नीति के तहत 2008 या उसके बाद जन्मे पुरुष युवाओं को सेना में रुचि से संबंधित एक फॉर्म भरना होगा। महिलाएं इसमें स्वेच्छा से हिस्सा ले सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और नाटो में जर्मनी की जिम्मेदारी के चलते यह निर्णय लिया गया है। वहीं, कुछ लोगों ने इस कदम को नागरिक स्वतंत्रता पर असर डालने वाला भी बताया है, क्योंकि पहले यह नियम केवल संकट या युद्ध की स्थिति में ही लागू होता था।
इस बदलाव से जर्मनी की सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव और भविष्य में संभावित सैनिकों के रिकॉर्डिंग की तैयारी का संकेत मिलता है।