उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक सेवा वाहनों की निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए परिवहन विभाग ने वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) व्यवस्था को लेकर अहम निर्णय लिया है। सरकार ने 1 जनवरी 2019 से पहले और बाद में पंजीकृत सार्वजनिक सेवा वाहनों में वीएलटीडी लगाने के लिए कई नई कंपनियों और उपकरण मॉडलों को मंजूरी दी है। साथ ही कुछ कंपनियों के अधिकार क्षेत्र में भी संशोधन किया गया है।

परिवहन विभाग का उद्देश्य

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से वाहन मालिकों को अधिक विकल्प मिलेंगे और उपकरण लगाने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल होगी।

कई कंपनियों और उपकरणों को मंजूरी

विभाग के अनुसार PSDN टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के उपकरण को स्टेलेंटिस कंपनी के वाहनों में लगाने की अनुमति दी गई है। वहीं Acute Communication Services Pvt. Ltd. के Acut 140 डिवाइस को PMI इलेक्ट्रो मोबिलिटी के वाहनों के लिए स्वीकृति मिली है।

इसके अलावा APM ग्रुप के Nirbhayan और APM Kings Track India Pvt. Ltd. के 1819001A डिवाइस को भी PMI वाहनों में उपयोग के लिए पंजीकृत किया गया है।

विभिन्न वाहन मॉडलों में नई अनुमति

UNO Minda Ltd. के उपकरण अब टोयोटा की इनोवा क्रिस्टा और इनोवा हाईक्रॉस में लगाए जा सकेंगे। वहीं VT D-12 डिवाइस को होंडा अमेज, टोयोटा रुमियन, अर्बन क्रूजर हाईराइडर और एमजी मोटर्स के कुछ मॉडलों में अनुमति दी गई है।

इसके साथ ही Blackbox GPS Technology और Wattsu Express के उपकरणों को फोर्स मोटर्स और BMW इंडिया के वाहनों में लगाने की मंजूरी दी गई है।

रिकॉर्ड में संशोधन और नाम हटाए गए

विभाग ने TrackNow और Triangle Infotech के रिकॉर्ड में वाहन निर्माताओं के नामों में संशोधन भी किया है। वहीं हुंडई कंपनी द्वारा EveryDay Autotech के प्राधिकरण को निरस्त किए जाने के बाद, शासन ने हुंडई को संबंधित सूची से हटा दिया है।

सभी RTO को सख्त निर्देश

परिवहन विभाग ने सभी क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केवल अधिकृत कंपनियों से ही वीएलटीडी उपकरण लगाए जाएं, ताकि प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।