सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने संकेत दिया है कि इस मामले में आदेश शुक्रवार या 25 मई को सुनाया जा सकता है।
सुनवाई में क्या कहा गया
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि जमानत याचिकाओं पर फैसला अनुच्छेद 21 को कम महत्व देने के आधार पर नहीं लिया गया है, बल्कि आरोपियों की कथित भूमिका और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय किया गया है।
हालिया टिप्पणियों पर अदालत की प्रतिक्रिया
बेंच ने यह भी कहा कि वह हालिया फैसलों में की गई टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देगी। अदालत ने मामले के व्यापक कानूनी पहलुओं पर विचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस विषय पर विस्तृत निर्णय जरूरी है।
UAPA मामलों पर बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। यह सवाल इस बात से जुड़ा है कि क्या लंबे समय तक जेल में रहना और ट्रायल में देरी, UAPA जैसे सख्त कानूनों के तहत जमानत की शर्तों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी बी वराले की बेंच ने कहा कि इस मुद्दे पर स्पष्ट और व्यापक निर्णय की आवश्यकता है। इसके बाद मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के पास उचित बड़ी बेंच के गठन के लिए भेज दिया गया।
दो अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत
इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि, अदालत ने सख्त शर्तें भी लागू की हैं और कहा है कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर अभियोजन पक्ष जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
मामला क्या है
यह पूरा मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी और जनहानि हुई थी। इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम सहित कई लोगों पर UAPA और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जबकि आरोपी पक्ष इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।