लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी-अपनी चुनौतियां होती हैं और उनके समाधान भी अलग तरीके से खोजने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष “खेती की बात खेत में” कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला है और किसानों में नया उत्साह पैदा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार कृषि नवाचार को सीधे जमीन पर उतारने का काम हुआ है, जिससे लैब में तैयार शोध अब खेतों तक पहुंच रहा है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसे आगे और विस्तार देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी नहीं है, केवल सही नेतृत्व और दिशा की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की पहलों की भी सराहना की।

नीतियों से आगे बढ़कर जमीनी क्रियान्वयन पर जोर

सीएम योगी ने कहा कि पहले योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। सरकार की कोशिश है कि हर योजना की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केंद्र थे, जिनमें से कई निष्क्रिय स्थिति में थे और उनकी जवाबदेही भी स्पष्ट नहीं थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नए कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करना चाहती थी, जिसे पहले स्वीकार नहीं किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे अपनाया और अब सभी केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

कृषि विकास दर और तकनीक पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर, जो पहले लगभग 8 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 18 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कृषि और उत्पादन के बीच बेहतर तालमेल से विकास को नई गति मिलती है। यूपी का कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में करीब 20 प्रतिशत योगदान दे रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक कृषि क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से कई अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्र स्थापित हुए हैं, जिनके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।

उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक खेती पर जोर

सीएम ने कहा कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से उत्पादन में काफी वृद्धि हो सकती है। उन्होंने बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों में प्रति हेक्टेयर 100 क्विंटल तक उत्पादन दर्ज किया गया है। बागवानी क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन लागत कम कर उत्पादन बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है।

उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

प्रगतिशील किसानों का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के किसान राम शरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही उनकी शैक्षणिक योग्यता सीमित है, लेकिन वे आधुनिक और वैज्ञानिक खेती का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ऐसे किसानों को चिन्हित कर उनके अनुभव अन्य किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि कुछ किसान तीन से चार फसलें तक ले रहे हैं और यह मॉडल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

बिजली और उत्पादन में सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसानों को 10 से 12 घंटे बिजली आपूर्ति मिल रही है, जिससे कृषि गतिविधियों में सुधार हुआ है। पहले जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण किसान पीछे रह जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

उन्होंने बताया कि इटावा, औरैया और कानपुर देहात जैसे क्षेत्रों में किसान तीन फसलें ले रहे हैं और मक्का से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गेहूं का उत्पादन लगभग 425 लाख मीट्रिक टन और आलू का उत्पादन 245 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है, जो एक रिकॉर्ड उपलब्धि है।