ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में गंभीर मरीजों को बेड न मिलने की समस्या लगातार सामने आ रही है। दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों को अक्सर निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कई मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि परिजन मरीजों को अन्य अस्पतालों में ले जाने को मजबूर हो रहे हैं।
सोमवार को बिजनौर से 85 वर्षीय एक गंभीर किडनी रोगी महिला को परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे। परिजनों के अनुसार, मरीज की हालत नाजुक थी और उन्हें तुरंत भर्ती की आवश्यकता थी। लेकिन अस्पताल में बेड उपलब्ध न होने की बात कहते हुए उन्हें भर्ती नहीं किया गया।
परिजन जावेद ने बताया कि वे करीब 113 किलोमीटर दूर से इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन यहां भी निराशा हाथ लगी। उन्होंने बताया कि मरीज की हालत को देखते हुए वे लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते थे, इसलिए बाद में उन्हें निजी एंबुलेंस की मदद से जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल ले जाया गया।
इसी तरह एक अन्य मरीज के परिजनों ने बताया कि वे पिछले चार दिनों से बेड और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी बढ़ रही है।
मरीजों और परिजनों में बढ़ रही असंतोष की भावना
एम्स में बेड की कमी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। गंभीर मरीजों को भी भर्ती न मिल पाने के कारण उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। कई परिजनों ने इमरजेंसी में भी बेड को लेकर परेशानी और स्टाफ के व्यवहार को लेकर असंतोष जताया है।
इसके अलावा मरीजों ने ई-रिक्शा सेवा की कमी, लंबी पैदल दूरी और शौचालयों में साफ-सफाई की कमी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल उठाए हैं।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी संदीप कुमार के अनुसार, बेड की कमी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मरीजों के दबाव के चलते यह स्थिति बनती है, जिसे दूर करने के लिए सेवा विस्तार और सरकारी सहयोग की आवश्यकता है। साथ ही प्राथमिक स्तर के मरीजों को जिला अस्पतालों में इलाज मिलने से एम्स पर बोझ कम किया जा सकता है।