देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के समीप कृषि भूमि पर की गई अवैध प्लाटिंग के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए पूरे प्रकरण की गहन जांच के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य क्षेत्र के आसपास नियमों को दरकिनार कर कॉलोनियां बसाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। सरकार यह पता लगा रही है कि शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई भूमि किन परिस्थितियों में बेची गई और इसमें किन-किन स्तरों पर भू-कानूनों की अनदेखी हुई।
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट के पास मौजूद करीब 20 एकड़ कृषि भूमि को पहले 15 लोगों को बड़े भूखंडों के रूप में बेचा गया। इसके बाद इन खरीदारों ने जमीन पर अवैध कॉलोनी विकसित कर लगभग 80 लोगों को छोटे-छोटे प्लाट बेच दिए। यह पूरा लेनदेन भूमि उपयोग नियमों के विपरीत पाया गया है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मामले में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम की धारा 166 और 167 के तहत संबंधित खरीदारों और विक्रेताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर पूरी भूमि को सरकार में निहित करने की कार्रवाई की जाएगी।
कानून के अनुसार, धारा 166 के तहत अवैध तरीके से किया गया भूमि हस्तांतरण स्वतः अमान्य हो जाता है, जबकि धारा 167 के अंतर्गत ऐसी भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार स्थापित हो जाता है। जिलाधिकारी को ऐसी भूमि को अपने कब्जे में लेने का अधिकार भी प्राप्त है।
प्रशासन के अनुसार यह जमीन ग्राम हरियावाला धौलास, पछुवादून परगना (विकासनगर) क्षेत्र में स्थित है, जहां पहले एक मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान स्थापित किया जाना था। परियोजना में अड़चन आने के बाद हाईकोर्ट ने सशर्त रूप से जमीन बेचने की अनुमति दी थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि भूमि का उपयोग केवल कृषि कार्यों के लिए ही किया जाएगा। इसके बावजूद यहां आवासीय प्लाटिंग कर दी गई, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न होने की बात प्रशासनिक रिपोर्ट में कही गई है।