1 मई से प्रस्तावित आदि कैलाश यात्रा के आधिकारिक शुभारंभ से पहले ही नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। आरोप है कि निर्धारित तारीख से पहले ही कुछ स्थानीय टूर ऑपरेटर श्रद्धालुओं को बिना आवश्यक अनुमति के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचा रहे हैं, जिससे प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
बिना इनर लाइन परमिट के सीमांत क्षेत्र में प्रवेश
सूत्रों के अनुसार, कई यात्रियों को बिना प्रशासनिक मंजूरी और इनर लाइन परमिट (आईएलपी) के ही प्रतिबंधित क्षेत्रों में ले जाया जा रहा है। जबकि नियम स्पष्ट हैं कि आदि कैलाश यात्रा के लिए आईएलपी अनिवार्य है और इसके बिना किसी भी यात्री को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती। ऐसे में बिना परमिट यात्रियों की आवाजाही को गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासन की ओर से अभी तक आईएलपी जारी करने की आधिकारिक तारीख भी घोषित नहीं की गई है। इसके बावजूद लोगों का सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचना व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। व्यास टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष प्रवेश नबियाल और टूर ऑपरेटर दीपेश नेगी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि बिना अनुमति लोग क्षेत्र में जा रहे हैं तो यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर स्थिति है और प्रशासन को तत्काल सख्त कदम उठाने चाहिए।
रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाका
भारत-चीन सीमा के पास स्थित आदि कैलाश क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में बिना अनुमति आवाजाही न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा जोखिम भी पैदा कर सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करता है।
पांच दिन में जांच रिपोर्ट तलब
उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि यात्रियों की ओर से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। मामले की जांच के लिए आईटीबीपी को निर्देश दिए गए हैं और पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो को भी संज्ञान में लेकर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।