नई दिल्ली। जेईई एडवांस्ड 2026 परीक्षा से जुड़ा डेटा लीक का मामला सामने आने के बाद शिक्षा और तकनीकी सुरक्षा तंत्र में हलचल मच गई है। इस परीक्षा के लिए आईआईटी रुड़की को नोडल संस्थान बनाया गया है, जबकि परीक्षा से संबंधित अधिकांश डेटा और एक्सेस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियंत्रण में रहता है।

आईआईटी से जुड़े सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के तहत संस्थान के कुछ चुनिंदा अधिकारियों को ही सीमित और आंशिक एक्सेस प्रदान किया गया था।

रातभर चली उच्चस्तरीय बैठक

सूत्रों का कहना है कि मंगलवार रात पूरे मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और आईआईटी रुड़की के बीच लगातार चर्चा और समीक्षा बैठकें चलती रहीं। इसके बाद तय किया गया कि साइबर सुरक्षा से जुड़े दावे और सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के जवाब में संस्थान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाए।

एथिकल हैकर के दावे के बाद सामने आया मामला

मामला तब चर्चा में आया जब एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता (एथिकल हैकर) ने दावा किया कि ऑनलाइन सिस्टम में सुरक्षा खामी के चलते लगभग 1.79 लाख छात्रों के परीक्षा रिकॉर्ड और करीब 1.87 लाख एडमिट कार्ड पीडीएफ बिना किसी ऑथेंटिकेशन के एक्सेस किए जा सकते थे।

इन दावों के सामने आने के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया और जांच प्रक्रिया शुरू की गई।

आईआईटी का स्पष्टीकरण और प्रतिक्रिया

आईआईटी रुड़की की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि संबंधित तकनीकी समस्या की पहचान कर उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक कर लिया गया है।

संस्थान ने एथिकल हैकर को धन्यवाद देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित डेटा केवल रीड-ओनली मोड में उपलब्ध था, जिससे उसमें किसी तरह का बदलाव या छेड़छाड़ संभव नहीं थी।

जांच पर नजर

हालांकि पूरे मामले पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन मंत्रालय स्तर पर इसे गंभीरता से लेते हुए तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।