देहरादून। उत्तराखंड में जंगलों में आग लगाने की घटनाओं को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ न केवल कार्रवाई तेज की जाएगी, बल्कि उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
प्रमुख सचिव (वन) रमेश कुमार सुधांशु ने बुधवार को सचिवालय में वनाग्नि की स्थिति की समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर सख्ती जरूरी है और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक वनाग्नि से जुड़े मामलों में 92 वन अपराध दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 16 मामलों में पुलिस एफआईआर भी दर्ज की गई है।
प्रमुख सचिव ने सभी जिलों में तैनात नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लगातार फील्ड में सक्रिय रहें और मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर रखें, ताकि किसी भी घटना पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके। उन्होंने अग्नि नियंत्रण व्यवस्था के रिस्पांस टाइम को कम करने और समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने जिलाधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें सचिव सी. रविशंकर, अपर सचिव हिमांशु खुराना, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आर.के. मिश्र, प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल और मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन) सुशांत पटनायक शामिल थे।
400 से अधिक घटनाएं दर्ज
राज्य में वनाग्नि की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। 15 फरवरी से अब तक 400 से अधिक आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनसे कुल 356.02 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार गढ़वाल में 316 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनसे 265.22 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। कुमाऊं में 75 घटनाओं में 64.55 हेक्टेयर और वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में 36 घटनाओं में 26.25 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।