पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। कचहरी परिसर स्थित पंडित नानक चंद सभागार में हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें वेस्ट यूपी के 22 जिलों के बार एसोसिएशनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की मांग पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो “बेंच नहीं तो वोट नहीं” का नारा और अधिक मजबूती से उठाया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र के वकीलों की अन्य समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता समिति के चेयरमैन एवं मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा ने की, जबकि संचालन मेरठ बार के महामंत्री परवेज आलम ने किया। अधिवक्ताओं ने बताया कि पश्चिमी यूपी में उच्च न्यायालय की खंडपीठ की मांग पिछले पांच दशकों से लंबित है और इसके समर्थन में हर शनिवार को प्रतीकात्मक हड़ताल जारी है, जिसे अब और प्रभावी रूप देने पर सहमति बनी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, कानून मंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा। अधिवक्ताओं ने पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर अनावश्यक चालान, दुर्व्यवहार और झूठे मुकदमों को लेकर भी चिंता जताई और मांग की कि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित बार एसोसिएशन को विश्वास में लिया जाए।

इसके अलावा अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम को शीघ्र लागू करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि 20 मई 2026 को हापुड़ और नोएडा बार पदाधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस के विरोध में न्यायिक कार्य से विरत रहने का कदम उठाया जाएगा।

बैठक में गाजियाबाद, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रामपुर, अलीगढ़, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत सहित कई जिलों के बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष, महामंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।