दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) 31 जनवरी से चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर बाइक टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और कैब सेवाओं की शुरुआत करने जा रही है। इसका उद्देश्य मेट्रो से उतरने के बाद यात्रियों को हो रही असुविधा को कम करना और उन्हें बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
क्यों जरूरी है यह पहल?
अक्सर मेट्रो से उतरने के बाद ऑटो या कैब मिलने में समय लग जाता है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। नई व्यवस्था के तहत:
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स्टेशनों पर उतरते ही तुरंत परिवहन विकल्प मिलेंगे।
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इंतजार का समय घटेगा।
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घर या दफ्तर तक डोर-टू-डोर यात्रा आसान होगी।
विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों और व्यस्त ऑफिस क्षेत्रों में इसका लाभ अधिक मिलेगा।
कौन से स्टेशन होंगे शामिल?
यह सुविधा दिल्ली और एनसीआर के 10 व्यस्त मेट्रो स्टेशनों से शुरू होगी:
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न्यू दिल्ली
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मिलेनियम सिटी सेंटर (गुरुग्राम)
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लाजपत नगर
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हौज खास
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राजीव चौक
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कश्मीरी गेट
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बॉटनिकल गार्डन
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वैशाली
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सिकंदरपुर
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नेहरू प्लेस
ये सभी स्टेशन मुख्य बाजार, ऑफिस हब और ट्रांजिट पॉइंट्स के नज़दीक स्थित हैं।
किसके साथ साझेदारी?
DMRC ने सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (STCL) के साथ समझौता किया है। STCL 'भारत टैक्सी' प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह सेवा प्रदान करेगा। इसमें पारदर्शी किराया और कोऑपरेटिव मॉडल पर जोर है।
बाइक टैक्सी का पायलट प्रोजेक्ट:
पहले चरण में बाइक टैक्सी सेवा को पायलट के तौर पर मिलेनियम सिटी सेंटर और बॉटनिकल गार्डन में शुरू किया जाएगा। DMRC इस पायलट के जरिए संचालन की व्यवहारिकता और यात्रियों की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करेगी, और सफल होने पर अन्य स्टेशनों तक इसे बढ़ाया जाएगा।
डिजिटल इंटीग्रेशन:
नई सेवाएं DMRC सारथी एप के साथ भारत टैक्सी एप से जुड़ेंगी। यात्री इससे:
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उपलब्ध लास्ट-माइल विकल्प देख सकेंगे
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किराए का अनुमान ले सकेंगे
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वाहन ट्रैक कर सकेंगे
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पूरी यात्रा एक ही प्लेटफॉर्म पर प्लान कर सकेंगे
किराया और सर्ज प्राइसिंग:
किराया मार्केट रेट के अनुसार रखा जाएगा। पीक ऑवर्स में मामूली बदलाव हो सकता है, लेकिन सर्ज प्राइसिंग सीमित रहेगी ताकि अतिरिक्त बोझ न पड़े।
पहले से मौजूद नेटवर्क:
फिलहाल DMRC के 158 स्टेशनों पर लास्ट-माइल सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 44 स्टेशनों पर 1,445 ई-ऑटो चल रहे हैं। अब बाइक टैक्सी और कैब सेवाओं के जुड़ने से यह नेटवर्क और मजबूत होगा।
यात्रियों को लाभ:
इस पहल से मेट्रो से उतरने के बाद यात्रा कम थकाऊ और सुव्यवस्थित होगी। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत होने से मेट्रो की उपयोगिता और बढ़ेगी और रोजाना यात्रा का अनुभव बेहतर बनेगा।