मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के बहुचर्चित कपसाड़ कांड में आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। करीब पांच महीने से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) ने सभी दस्तावेजों, शैक्षणिक रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट की विस्तृत जांच के आधार पर उसे बालिग घोषित कर दिया है।

इस फैसले के बाद अब आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह से हटाकर जिला जेल भेजा जाएगा। साथ ही, मामले की आगे की सुनवाई अब एससी-एसटी कोर्ट में होगी।

अपहरण और हत्या से जुड़ा मामला

कपसाड़ गांव निवासी नरसी ने सरधना थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया था कि 8 जनवरी 2026 को उनकी मां सुनीता और बहन रूबी खेत पर काम कर रही थीं। इसी दौरान गांव के ही पारस सोम पर रूबी के अपहरण का आरोप लगाया गया।

आरोप है कि विरोध करने पर आरोपी ने सुनीता के सिर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया था।

पुलिस ने 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर युवती को सुरक्षित बरामद कर लिया था।

उम्र विवाद में चला लंबा कानूनी संघर्ष

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जेल भेजा गया, लेकिन बाद में परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए किशोर न्याय बोर्ड में याचिका दायर की। इसके बाद मामला जेजे बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया।

बचाव पक्ष ने आदर्श जनता इंटर कॉलेज, कपसाड़ की हाई स्कूल मार्कशीट पेश की, जिसमें जन्मतिथि 11 मई 2008 दर्ज थी। कोर्ट ने स्कूल रिकॉर्ड, एडमिशन रजिस्टर और कक्षा 1 से 5 तक के दस्तावेजों की भी जांच करवाई।

मेडिकल रिपोर्ट ने बदला पूरा फैसला

दस्तावेजों में विरोधाभास को देखते हुए 12 मई को आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में उसकी उम्र 19 वर्ष पाई गई।

घटना की तारीख के आधार पर वैज्ञानिक गणना के अनुसार, वारदात के समय आरोपी की उम्र लगभग 18 वर्ष 7 माह 26 दिन निर्धारित की गई। इसी आधार पर जेजे बोर्ड ने उसे बालिग मानते हुए फैसला सुनाया।