करगहर का लाल बनेगा मुख्यमंत्री, तो बदलेगा बिहार का भविष्य : रितेश रंजन पांडेय

HIGHLIGHTS
- जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी रितेश रंजन पांडेय ने कहा कि अगर इस बार जनता जन सुराज की सरकार बनाती है, तो करगहर का लाल बिहार का मुख्यमंत्री बनेगा।
- उन्होंने बताया कि जन सुराज पार्टी के प्रणेता प्रशांत किशोर का जन्म करगहर में ही हुआ था, जब उनके पिता डॉ.
- श्रीकांत पांडेय यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित थे।
- रितेश के अनुसार, “अगर प्रशांत किशोर बिहार की बागडोर संभालते हैं, तो यह केवल करगहर ही नहीं, बल्कि पूरे भोजपुरिया समाज के लिए गर्व का क्षण होगा।” उन्होंने कहा कि जन सुराज आंदोलन…
रोहतास। जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी रितेश रंजन पांडेय ने कहा कि अगर इस बार जनता जन सुराज की सरकार बनाती है, तो करगहर का लाल बिहार का मुख्यमंत्री बनेगा। उन्होंने बताया कि जन सुराज पार्टी के प्रणेता प्रशांत किशोर का जन्म करगहर में ही हुआ था, जब उनके पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित थे। रितेश के अनुसार, “अगर प्रशांत किशोर बिहार की बागडोर संभालते हैं, तो यह केवल करगहर ही नहीं, बल्कि पूरे भोजपुरिया समाज के लिए गर्व का क्षण होगा।”
उन्होंने कहा कि जन सुराज आंदोलन का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य को नई दिशा देना है। “हमारे लिए धन कमाना नहीं, राज्य का विकास ही प्राथमिकता है,” रितेश ने कहा। उन्होंने जनता से अपील की कि एक बार अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए जन सुराज को मौका दें।
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए रितेश ने बताया कि उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा है। बचपन से ही संघर्ष उनका साथी रहा। संगीत के क्षेत्र में आने की कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि बनारस में क्रिकेट खेलने के दौरान वे दोस्तों के साथ गीत गाते थे। उनकी आवाज की प्रशंसा ने उन्हें संगीत की ओर प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने बनारस से संगीत में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और मुंबई की ओर रुख किया।
उन्होंने बताया कि मुंबई में शुरुआती दिनों में उन्हें सामान्य डिब्बों में सफर करना पड़ता था और कई बार पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ीं। “उसी वक्त समझ आया कि गरीबी क्या होती है,” उन्होंने कहा। मेहनत और लगन के बल पर रितेश ने संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और कई देशों में प्रदर्शन का अवसर पाया।
उन्होंने कहा- रितेश का कहना है कि बिहार की असली ताकत उसकी जनता और युवाओं में है। “अगर लोग बदलाव चाहते हैं, तो उन्हें इस बार जन सुराज के पक्ष में मतदान करना चाहिए”।
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