23 जून, 2026 को लखनऊ के अलीगंज के ट्रेनिंग सेंटर में 15 छात्र-छात्राओं के जीवित जिंदा जल जाने के हादसे से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरा भारत दहल गया है। सिस्टम की खामियां हर भीषण दुर्घटना में सतह पर आती है और फिर सब यथावत चलने लगता है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ का दौरा बीच में छोड़कर राजधानी लौटे और दुर्घटनास्थल जाकर वस्तुस्थिति जानी। लखनऊ विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और मकान मालिक तथा कोचिंग सेंटर चलाने वाले कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। अवैध अनधिकृत भवन तोड़ डाला गया। मृतक युवाओं के परिजनों को 7 लाख रुपये मुआवजा, घायलों का सरकारी स्तर पर इलाज किया जा रहा है।
दूसरी ओर सपा मुखिया अखिलेश यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय राजनीति चमकाने पहुंच गए। सपा प्रमुख स्वीकारते हैं कि मकान की खामियां, सुरक्षा की कमियां तथा अवैध निर्माण हमारी सरकार के दौरान कें हैं। योगी महाराज 9 वर्षों से शासन कर रहे हैं क्या उन्हें हमारी सरकार की गलतियों को सुधारना नहीं चाहिए था। अखिलेश यादव ने मृतक छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड रुपये देने की मांग करते हुए कहा कि योगी जी का खजाना तों भरा हुआ है, उन्हें लालच नहीं करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा भी इसी प्रकार की थी मानो वे दुःख रंज के माहौल में न बोल राजनीति के पत्ते फेंट रहे हों।
शासन हो या विपक्ष, सिस्टम सुधारने का स्थायी इलाज कोई करना नहीं चाहता। हादसा हो जाने पर ही भाषण झाड़ते हैं। क्या देश, प्रदेश में सदा ऐसा ही चलेगा?
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'