मुजफ्फरनगर के नागरिक यह देख कर प्रसन्न है कि शहर में चारों ओर निर्माणकार्य तथा सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। नगर पालिका परिषद की चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप शहर के विभिन्न स्थानों पर नवनिर्मित सड़कों-मार्गों या पार्कों का लोकार्पण करते अथवा निरीक्षण करते दिखाई पड़ जाती हैं। पालिका द्वारा कराया जाने वाला काम लोगों को दिखाई दे रहा है तो लोग उसकी प्रशंसा भी करते हैं।
दूसरी ओर सभासद शिकायत करते हैं कि निर्माण कार्यों में गड़बड़ है। सही सामग्री नहीं लगाई जाती, अधोमानक सामान से निम्नस्तरीय निर्माण होता है। नाले के निर्माण में सरिया न लगाने तथा कम सीमेंट के प्रयोग से नवनिर्मित नाले की 100 फीट लम्बी दीवार ढह गई। इसके चित्र भी प्रकाशित हुए।
नगर पालिका परिषद के सभासदगण योगेश मित्तल, राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, सीमा जैन, रजत धीमान तथा देवेश कौशिक ने निविदाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाया है जबकि अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह ने कहा है कि 218 निविदाओं की जांच में केवल 4 निविदाओं में अनियमितता मिली है।
इधर वार्ड संख्या 55 के सभासद उम्रदराज की शिकायत पर जिला अधिकारी उमेश मिश्र मौहल्ला खालापार की नवनिर्मित सड़क का निरीक्षण करने स्वयं मौके पर पहुंचे। फक्कड़ शाह चौक से सेनेटरी स्टोर तक की 247 मीटर लम्बी नवनिर्मित सड़क में पड़ी दरार को उन्होंने खुद अपनी आंखों से देखा और इस पर नाराज़गी प्रकट की।
इन परिस्थितियों को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि नगरपालिका परिषद को क्या प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी की तरह संचालित किया जा रहा है। गत वर्ष स्वायत शासी इकाइयों के लेखा परीक्षण निदेशालय की ऑडिट टीम प्रयागराज से मुजफ्फरनगर पहुंची थी। टीम को पालिका के आय-व्यय तथा कराधान संबंधी कागजात एवं पत्रावलियां नहीं दी गई थीं, इसकी लिखित शिकायत जिला अधिकारी महोदय से की गई थी। प्रभावित कर्मचारियों ने इस पर गुलगपाड़ा मचाया था और कार्यालयों का काम बन्द करके बैठ गये थे।
मतदाता तो चेयरमैन/चेयरपर्सन तथा वार्ड के सभासदों को पांच वर्ष में एक बार वोट देकर किनारे बैठ जाता है। पालिका को तो ये ही लोग चलाते हैं। वार्डों मे नागरिकों या मतदाताओं की कोई अनौपचारिक या गैर नागरिक समिति नहीं जो पालिका के कार्यों की निगहबानी करे। अध्यक्ष, सभासद अधिकारी ही नहीं कुछ नागरिक भी उदासीन रहते हैं। लिखते हुए शर्म आती है कि कुछ लोग पालिका की सम्पत्ति को चुराने से भी बाज नहीं आते। कच्ची सड़क पर नाले का निर्माण हो चुका है, सड़क का पुनर्निमाण कार्य चल रहा है। सड़क, नाले की पुरानी ईंटें व नई ईंटें भी तथा रोड़ी-रेत बालू के ढेर सड़क के किनारे लगे हैं। भाई लोग सवेरे सवेरे कट्टों में भर कर मनचाही निर्माण सामग्री पार कर देते हैं। इन्हें कौन रोके? रोड़ी-पथरी बालू पर किसी ब्रांड का ठप्पा तो लगा नहीं? फिर घर में तलाशी की जहमत कौन और क्यों उठाये? ये वे ही लोग होंगे जो पालिका के कर्मचारियों व ठेकेदारों पर कमीशन खोरी का आरोप लगाते हैं या वे हैं जिनकी आत्मा मर चुकी है।
कहने का तात्पर्य यह है कि यदि शहर का नागरिक जागरूक और ईमानदार है तो पालिका के कर्णधार ईमानदारी व मुस्तैदी से जनसेवा में तत्पर रहेंगे।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'