हर वित्तीय वर्ष के लिए जब केन्द्र या राज्य सरकार का बजट पेश होता है, तब मीडिया उसे सभी को खुश करने वाला, आम जनता का कमर तोड़ने वाला, चुनाव सिर हुए तो चुनावी बजट या फिर रेवड़ियां बांटने वाला बजट बताया है। वित्त मंत्री ने कितना ही बेहतर, संतुलित बजट बनाया हो, विरोधी दलों के नेताओं को कहना ही है कि बजट ने देश की अर्थव्यवस्था चौपट कर दी है। और जो न तीन में हैं न तेहरा में भी पालतू मीडिया के जरिये बजट पर अपनी राय देकर खुद को बहुत बड़ा अर्थशास्त्री दिखाने की कोशिश करते हैं।
एक फरवरी 2026 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 12.2 लाख करोड़ रुपये का केन्द्रीय बजट पेश किया। केन्द्र की नीति किसान तथा कृषि को प्रोत्साहन देना है। इस कृषक हितैषी नीति के अनुरूप केन्द्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में 1,40,528 करोड़ रुपये का प्रावधान किया तो किसानों के नकली हमदर्द कहने लगे कि नरेंद्र मोदी ने किसान के लिए कुछ नहीं दिया। 140 करोड़ हिन्दुस्तानियों का पैसा उनकी जेबों से निकाल कर अडानी-अंबानी की तिजोरियों में भर दिया।
11 फरवरी, 2026 को संसदीय कार्य एवं वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने उत्तरप्रदेश विधानसभा में 9.12 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। 2026-27 के नये बजट में कृषि एवं ग्राम विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। कृषि का बजट 20 प्रतिशत बढ़ाया गया। कृषि के लिए 10,888 करोड, पंचायती राज का बजट 67 प्रतिशत बढ़ा कर 32090 करोड़ रुपये किया गया। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक उत्सव भवन का निर्माण, ग्रामीण स्टेडियम, ओपन जिम का निर्माण। स्वच्छ ग्रामीण भारत मिशन के लिए 282 करोड़ रुपये का प्रावधान, ग्रामीण डिजिटल लाइब्रेरी हेतु 45 करोड़ रुपये, किसानों के लिये सोलर पंपों हेतु 637.84 करोड़ रुपये, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण 18290 करोड़ रूपये, ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए 22,676 करोड़ रुपये, छुट्टा गोवंश संरक्षण केन्द्रों के लिए 2100 करोड़ रुपये, बागबानी, खाद्य प्रसंस्करण पर 2,832 करोड़ रुपये, प्रदेश में पांच बीज पार्कों की स्थापना हेतु 155 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए 298 करोड़ रुपये। प्राकृतिक खेती का क्षेत्रफल बढाकर 94,300 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। सहकारी खाद गोदामों के निर्माण हेतु 150 करोड रुपये, पौधारोपण, वन एवं पर्यावरण शुद्धिकरण हेतु 1209 करोड़ रुपये, ग्रामों में सड़कों, संपर्क मार्गों के निर्माण हेतु 822 करोड़ रूपये, बकरी प्रक्षेत्र स्थापना हेतु 81 करोड़, पशुधन मिशन पर 10 करोड़ रुपये व्यय करने वा लक्ष्य है। कुल मिलाकर योगी सरकार ग्राम्य विकास के लिए भारी भरकम रकम खर्च करने जा रही है किन्तु किसानों से एक स्वयंभू नेता ने कह दिया कि सुरेश खन्ना के बजट ने किसानों का भट्टा बैठा दिया। किसान को बजट में कुछ नहीं मिला। बजट से किसानों की आय बढ़ने के बजाय घाटा ही होगा।
लाखों करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी किसान की अवनति होती है तो बहतरी का फॉर्मूला सार्वजनिक तौर पर बताया जाना चाहिए, जिससे किसान की तरक्की हो और उत्तर प्रदेश भी समृद्धशाली बने। ऐसा उपाय तुरन्त घोषित होना चाहिए। जो भी सरकार केन्द्र में या राज्यों में बनेगी, वह अपना बजट तो बनायेगी हीं, अतः जादुई छड़ी चलाने का फार्मूला सामने आना चाहिए।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'