नई दिल्ली। नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड की मांग पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल 21 जून को प्रस्तावित परीक्षा निर्धारित पेन-पेपर प्रारूप में ही आयोजित होगी।
यह मांग राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका में उठाई गई थी। याचिका में कहा गया था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दोबारा होने वाली परीक्षा कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराई जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने मामले की तात्कालिकता का हवाला देते हुए परीक्षा प्रारूप में बदलाव की मांग की। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि परीक्षा आयोजन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और व्यवस्थागत पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी प्रकार की मांग पहले भी उसके समक्ष आ चुकी है, जिसे स्वीकार नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दी गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है।
इस बीच, पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई को भी लगातार सफलता मिल रही है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार तीन आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इनमें एनटीए से जुड़ी भौतिकी की लेक्चरर मनीषा संजय हवलदार, महाराष्ट्र के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरुरे और पुणे के शिक्षक तेजस हर्षद कुमार शाह शामिल हैं।
सीबीआई का आरोप है कि आरोपितों ने कथित साजिश के तहत परीक्षा प्रश्नपत्र तक अनधिकृत पहुंच हासिल की और आर्थिक लाभ के लिए उसे साझा किया। एजेंसी अब तक इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य याचिका पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और मामले की विस्तृत सुनवाई जुलाई में करने का निर्णय लिया है। इसी दौरान केंद्र सरकार से भविष्य में परीक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी जवाब मांगा गया है।
अब सभी की नजर जुलाई में होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जहां परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।