नासा के अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने चेतावनी दी है कि अंटार्कटिका का आइसबर्ग A-23A लगातार पिघल रहा है। यह विशाल आइसबर्ग 1986 में महाद्वीप से अलग हुआ था और उस समय इसका क्षेत्रफल लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर था। अब वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिकुड़कर लगभग 1,180 वर्ग किलोमीटर रह गया है।
सैटेलाइट तस्वीरों में आइसबर्ग की सतह पर नीले रंग का पिघला पानी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। नासा और एनएसआईडीसी (National Snow and Ice Data Center) के विशेषज्ञों ने इसकी तेजी से पिघलती स्थिति पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक यह A-23A अंटार्कटिका के सबसे बड़े आइसबर्गों में से एक था।
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह आइसबर्ग साउथ अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है और रास्ते में यह कई बड़े टुकड़े छोड़ रहा है। उदाहरण के लिए, 2025 में इसके A23D, A23E और A23F नामक हिस्से अलग हो गए थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दक्षिणी गोलार्ध की गर्मियों में यह पिघलने की प्रक्रिया और तेज हो जाएगी और इस चार दशक पुराने मेगाबर्ग की यात्रा अब समाप्ति की ओर बढ़ रही है।
कोलोराडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया कि बर्फ की दरारें उस पर जमा पानी के दबाव से और बढ़ जाती हैं। सतह पर दिखाई देने वाला चमकीला नीला रंग पिघले पानी के कारण है, जो बर्फ की गहराइयों में भर जाता है। इसके बहाव और वितरण को प्राचीन ग्लेशियर की धाराओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है।