नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका अब उनके देश के लिए भरोसेमंद वार्ताकार नहीं रह गया है, लेकिन इसके बावजूद तेहरान बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दे पर एक संतुलित और निष्पक्ष समझौते के लिए तैयार है, बशर्ते उसकी संप्रभुता और हितों का सम्मान किया जाए।
एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी से बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी तरह के युद्ध की ओर नहीं बढ़ना चाहता। हालांकि, उन्हें आशंका है कि गलत सूचनाओं और गलत आकलन के आधार पर कोई सैन्य टकराव भड़काया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ ताकतें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष की दिशा में ले जाना चाहती हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ट्रंप विवेकपूर्ण निर्णय लेंगे।
बातचीत पर टूटा भरोसा, लेकिन रास्ता अब भी खुला
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ वार्ता को लेकर भरोसा कमजोर पड़ा है, हालांकि कुछ मित्र देश दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहे हैं। अराघची के मुताबिक यह प्रक्रिया कठिन जरूर है, पर असंभव नहीं। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने को तैयार होता है, तो किसी समझौते की संभावना बन सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप का यह रुख कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने चाहिए, ईरान की नीति से मेल खाता है, लेकिन इसके बदले ईरान को आर्थिक दबाव से मुक्त किया जाना जरूरी है।
पश्चिम एशिया में बढ़ी अमेरिकी गतिविधि
इसी बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका ने अपनी सैन्य तैनाती को और मजबूत किया है। ईरान के पास यूएसएस अब्राहम लिंकन की अगुवाई में एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा तैनात किया गया है। उधर, ट्रंप ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो से बयान देते हुए कहा है कि वह अब भी किसी समझौते को लेकर आशावान हैं।
खामेनेई की कड़ी चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को चेताया है कि यदि युद्ध थोपा गया तो उसका दायरा सीमित नहीं रहेगा और पूरा क्षेत्र उसकी चपेट में आ सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह की सैन्य धमकी या युद्धपोतों से डरने वाला नहीं है।