वेटिकन के पहले लैटिन अमेरिकी पादरी पोप फ्रांसिस का सोमवार को निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। फ्रांसिस के निधन के बाद अब सप्ताह भर चलने वाली वह प्रक्रिया शुरू हो गई, जिसमें लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। सबसे पहले, सेंट मार्टा चैपल में वेटिकन के अधिकारी और फिर सेंट पीटर्स में आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
इसके बाद, कार्डिनल्स कॉलेज के डीन कार्डिनल जियोवनी बैटिस्टा रे द्वारा उनका अंत्येष्टि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पोप फ्रांसिस को उनकी इच्छा के मुताबिक, शहर के दूसरी ओर स्थित सेंट मैरी मेजर बैसिलिका में दफनाया जाएगा। हालांकि, सदियों से दिवंगत पोप को दफनाने के लिए सेंट पीटर्स बैसिलिका या उसकी गुफाओं की परंपरा रही है। लेकिन पोप फ्रांसिस की तरफ से किए गए सुधारों में दिवंगत पोप को वेटिकन के बाहर दफनाने की अनुमति दी गई है। इन सुधारों का उद्देश्य इस पर और भी अधिक जोर देना था कि पोप का अंतिम संस्कार एक पादरी और प्रभु यीशु के अनुयायी के रूप में हो, न कि इस दुनिया के किसी शक्तिशाली व्यक्ति के तौर पर।
अंतिम संस्कार में अपनाई जाती हैं तीन प्रक्रियाएं
पोप के निधन के बाद मुख्य तौर पर अंतिम संस्कार से जुड़े तीन अहम प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। वेटिकन स्वास्थ्य सेवा के प्रमुख शव का परीक्षण करते हैं, मृत्यु के कारण का पता लगाते हैं और एक रिपोर्ट तैयार करते हैं। पार्थिव शरीर को सफेद वस्त्र पहनाया जाता है। निधन की औपचारिक घोषणा के लिए पार्थिव शरीर को पोप के निजी चैपल में रखा जाता है।
परंपराओं में बदलाव के बाद से अब पार्थिव शरीर को साइप्रस, कांच और ओक से बने तीन पारंपरिक ताबूतों में रखने की आवश्यकता नहीं होती। अब पोप के पार्थिव शरीर को लकड़ी के ताबूत में रखा जाता है, जिसके अंदर जस्ते का ताबूत होता है। पोप को लाल रंग का चोगा और ऊनी स्टोल पहनाया जाता है। पास में, उनकी पवित्र छड़ी रखी जाती है।
पार्थिव शरीर को जब बैसिलिका लाया जाता है, तो लिटनी ऑफ सेंट्स गाया जाता है। अंतिम संस्कार से पहले की रात अन्य वरिष्ठ कार्डिनल की मौजूदगी में कैमरलेंगो के नेतृत्व में ताबूत को बंद कर सील किया जाता है। पोप के चेहरे पर एक सफेद कपड़ा रखा जाता है। ताबूत में, पोप के उनके कार्यकाल के दौरान ढाले गए सिक्कों से भरा एक थैला रखा जाता है। साथ ही पोप के रूप में उनके कार्यकाल का एक लिखित विवरण भी रखा जाता है। जस्ते के ताबूत और लकड़ी के ताबूत दोनों के कवर पर ‘क्रॉस’ और पोप का प्रतीक चिह्न अंकित होता है।
पीएम मोदी ने दिया था भारत दौरे का न्योता, लेकिन अधूरा रह गया कार्यक्रम
पोप फ्रांसिस के अगले साल भारत आने की संभावना थी लेकिन उनके निधन के बाद यात्रा का कार्यक्रम अपूर्ण रह गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोप फ्रांसिस से 2021 और 2024 में दो बार मुलाकात की थी और उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया था। पोप ने इसे स्वीकार भी कर लिया था। पिछले साल दिसंबर में वेटिकन सिटी का दौरा करने वाले केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि यह बहुप्रतीक्षित यात्रा 2025 में कैथोलिक चर्च की तरफ से आयोजित ईसा मसीह के जयंती वर्ष समारोह के बाद होने की उम्मीद थी।