जमशेदपुर। नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के पीछे एक संगठित साजिश का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में इस मामले का मुख्य आरोपी जमशेदपुर स्थित एनआईटी का पूर्व छात्र आदित्य आनंद बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। इस घटना में दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक की तलाश जारी है।
प्रदर्शन से भड़की हिंसा
नोएडा के फेज-2 (होजियरी कॉम्प्लेक्स) क्षेत्र में सोमवार को मजदूरों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया था। इस दौरान पत्थरबाजी और कई वाहनों में आगजनी की घटनाएं हुईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह घटना अचानक नहीं, बल्कि पहले से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, इस पूरी घटना का मुख्य साजिशकर्ता हजारीबाग निवासी और एनआईटी जमशेदपुर का पूर्व छात्र आदित्य आनंद है।
दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
इस मामले में बिहार के ऑटो चालक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान को पुलिस ने 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के साथ आदित्य आनंद को भी इस साजिश का हिस्सा बताया गया है, जो फिलहाल फरार है।
पुलिस का कहना है कि आदित्य वर्ष 2020 से देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे प्रदर्शनों को भड़काने की गतिविधियों में शामिल रहा है।
डिजिटल नेटवर्क से जोड़े गए मजदूर
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा पहुंचकर मजदूरों को संगठित करना शुरू किया था। इसके बाद QR कोड के जरिए कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए, जिनमें मजदूरों को जोड़ा गया और इन्हीं माध्यमों से भीड़ को भड़काया गया।
पुलिस के मुताबिक, इससे पहले भी इन आरोपियों की मौजूदगी दिल्ली में हुए सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई थी।
विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट से फैलाई गई अफवाह
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, हिंसा के दौरान दो एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स—अनुषी तिवारी और मीर इलियास—से भ्रामक और फर्जी सूचनाएं फैलाई गईं, जिनमें मौतों को लेकर झूठी खबरें भी शामिल थीं।
साइबर जांच में यह भी सामने आया है कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे और इनका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति फैलाना था।