अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर तेवर सख्त करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बना मौजूदा समझौता अंतिम नहीं है और यह केवल एक प्रारंभिक सहमति या मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान तय शर्तों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका एक बार फिर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान को ईरान के प्रति गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

समझौते को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

ट्रंप से जब यह पूछा गया कि क्या यह समझौता अंतिम है, तो उन्होंने साफ कहा, “नहीं, यह अंतिम नहीं है।” उन्होंने इसे एक अस्थायी सहमति बताते हुए कहा कि अगर समझौते की शर्तें संतोषजनक नहीं रहीं तो कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का रुख पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा और यदि जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई दोबारा की जा सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और बाजार पर बयान

ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता काफी मजबूत है और इसके कई पहलू अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उनके अनुसार, इस कदम से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है।

उन्होंने यह भी कहा कि Strait of Hormuz जल्द ही पूरी तरह सामान्य स्थिति में आ जाएगा। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और यहां स्थिरता आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार को राहत मिल सकती है।

आर्थिक मदद के दावों का खंडन

हाल में आई उन खबरों को ट्रंप ने खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि समझौते के तहत ईरान को पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की सहायता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से ऐसा कोई वित्तीय पैकेज नहीं दिया जाएगा।

ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “हम एक भी डॉलर नहीं देंगे। न कोई निवेश होगा और न ही हमारे पास ऐसी कोई योजना है।”

खाड़ी देशों की भूमिका पर टिप्पणी

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका खाड़ी देशों पर ईरान में निवेश करने के लिए कोई दबाव नहीं डाल रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि कोई देश स्वेच्छा से निवेश करना चाहता है, तो अमेरिका को इससे आपत्ति नहीं होगी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे निवेश की संभावना फिलहाल कम है।

पूर्व समझौते और ओबामा पर निशाना

इसी दौरान ट्रंप ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार ने समझौते के लिए ईरान को भारी नकद राशि दी थी।

ट्रंप ने दावा किया कि यह रकम एक विमान के जरिए ईरान भेजी गई थी और इसे उन्होंने “गलत रणनीति” बताया। उनके अनुसार, उस दौर में ईरान ने अमेरिकी प्रशासन को गंभीरता से नहीं लिया था।