भुवनेश्वर। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर चुनौती दे दी है। अमेरिका ने ईरान की गतिविधियों के जवाब में अपना सबसे बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेजा है। वहीं ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास की योजना घोषित की है। अमेरिकी सेनाओं की केंद्रीय कमान ने ईरानी नौसैनिकों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी युद्धपोतों के पास खतरनाक युद्धाभ्यास, जैसे कि जहाजों के ऊपर से उड़ान भरना या टकराने की दिशा में स्पीडबोट भेजना, बर्दाश्त नहीं करेगी।
ईरान का रुख – बातचीत पर बल
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ मुख्य मांगों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि देश की रक्षा रणनीतियां और मिसाइल क्षमताएं कभी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होंगी।
सैन्य क्षमता मजबूत, आत्मविश्वास में वृद्धि
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, सेना प्रमुख अमीर हातमी ने हाल ही में संपन्न 12-दिवसीय युद्ध को देश की सैन्य शक्ति बढ़ाने वाला अनुभव बताया। उनके मुताबिक इस संघर्ष से सेना ने अपनी कमजोरियों और ताकतों का विश्लेषण किया और विरोधी पक्ष की रणनीति को भी समझा। हातमी ने कहा कि इस दौरान मिसाइल प्रणाली, हवाई रक्षा और संपूर्ण सैन्य क्षमताओं में सुधार हुआ है, जो भविष्य में किसी भी हमले से निपटने में मददगार साबित होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत
ईरान द्वारा किए जा रहे नौसैनिक अभ्यास का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह संकरा मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल-गैस मार्गों में से एक माना जाता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले तेल और गैस का कोई आसान वैकल्पिक रास्ता नहीं है, और इसका एक बड़ा हिस्सा एशियाई देशों को सप्लाई किया जाता है।
ईरान की चेतावनी – कोई समझौता नहीं
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली शमखानी ने चेतावनी दी है कि किसी भी दुश्मन कार्रवाई का जवाब पूरी ताकत और प्रभावी रूप में दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान सिर्फ समुद्री क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा और व्यापक सैन्य विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है। शमखानी ने कहा, “फारस और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी मौजूदगी बढ़ना उनकी बढ़त नहीं दर्शाता। यह हमारा क्षेत्र है, और इसकी भौगोलिक स्थिति और ताकत का हमें बेहतर ज्ञान है।”