नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह पर देश में सामाजिक अस्थिरता और अशांति फैलाने का आरोप लगाया है। सोमवार को संसद में बोलते हुए ओली ने कहा कि पूर्व राजा समाज में विभाजन पैदा करने और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके चलते राजतंत्र समर्थक प्रदर्शनों में हिंसा भड़क उठी।

हिंसा में दो की मौत, कई घायल

तिनकुने इलाके में भड़की हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें एक टीवी कैमरामैन सहित दो लोगों की जान चली गई और 110 अन्य घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि नेपाल में हिंदू राजतंत्र की पुनर्बहाली की जाए। अब तक इस मामले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पूर्व राजा पर गंभीर आरोप

प्रधानमंत्री ओली ने आरोप लगाया कि ज्ञानेन्द्र शाह ने उन लोगों के साथ मिलकर साजिश रची, जिन्होंने बैंक ऋण चुकाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि पूर्व राजा ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते समाज में अशांति फैलाने की कोशिश की।

हिंसक गतिविधियों की निंदा

ओली ने हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की और प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठ की। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और तेल निगम के डिपो को निशाना बनाने जैसी गंभीर घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की हिंसक घटनाओं को राजनीतिक गतिविधि नहीं माना जा सकता और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गृह मंत्रालय जल्द देगा रिपोर्ट

प्रधानमंत्री ने बताया कि गृह मंत्रालय इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संसद में पेश करेगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल की घटनाओं का विश्लेषण करना जरूरी है, क्योंकि धर्म, संस्कृति और परंपरा जैसे संवेदनशील मुद्दों को उकसाकर हिंसा भड़काने की कोशिश की गई है। ओली ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व राजा ने अपने आवास पर असामाजिक तत्वों को बुलाकर एक तथाकथित 'कमांडर' नियुक्त किया, जो अशांति फैलाने की साजिश में शामिल था।

आरपीपी का विरोध

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के सांसदों ने संसद में विरोध जताया। यह पार्टी नेपाल में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की समर्थक रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री ओली ने एक राजनीतिक बैठक में आरपीपी को शामिल नहीं किया था, जिससे विवाद और गहरा गया।