गुजरात की राजधानी गांधीनगर में संदिग्ध टाइफाइड के मामलों के सामने आने के बाद हालात पर सख्ती बरती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि स्थिति से निपटने के लिए पूरी तत्परता के साथ काम किया जाए। सरकारी बयान के मुताबिक, सेक्टर-24, सेक्टर-28 और आदिवाड़ा क्षेत्रों में पानी की पाइपलाइन में रिसाव के कारण जलजनित बीमारी फैलने की आशंका जताई गई है। अब तक करीब 100 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिसके बाद पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत के आदेश दिए गए हैं।

113 संदिग्ध मरीज, 94 का इलाज जारी
अब तक गांधीनगर में टाइफाइड के कुल 113 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 19 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 94 मरीजों का उपचार गांधीनगर सिविल अस्पताल और सेक्टर-24 व 29 के स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सभी भर्ती मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।

प्रभावित इलाकों में 24 घंटे ओपीडी
स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे ओपीडी सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। इसके साथ ही सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार गृह मंत्री, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, जिला कलेक्टर और नगर आयुक्त को हालात की जानकारी दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग को त्वरित इलाज के निर्देश
अमित शाह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से फोन पर बातचीत कर कहा कि बच्चों और अन्य मरीजों को समय पर और सही इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि अस्पतालों में इलाज और सुविधाओं में कोई कमी न रहे। साथ ही, प्रभावित और आसपास के इलाकों में पाइपलाइन लीकेज की जांच और मरम्मत को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

घर-घर सर्वे, एहतियाती कदम तेज
संदिग्ध मामलों के मद्देनजर नगर निगम की 75 स्वास्थ्य टीमें शहर में सक्रिय हैं। अब तक 20,800 से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है और करीब 90,000 लोगों तक पहुंच बनाई गई है। एहतियात के तौर पर 30,000 क्लोरीन टैबलेट और 20,600 ओआरएस पैकेट बांटे गए हैं।

सर्वे टीमें लोगों को जागरूक करने के लिए घर-घर जाकर पर्चे बांट रही हैं और पानी उबालकर पीने, बाहर का भोजन न करने तथा साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दे रही हैं। इसके अलावा, बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए पानी के सुपर क्लोरीनीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और पेयजल में क्लोरीन की मात्रा की नियमित जांच की जा रही है। प्रभावित इलाकों में चिन्हित लीकेज को तुरंत दुरुस्त करने का काम भी जारी है।