दिल्ली। भाजपा ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के विवादित इक्विटी रेगुलेशन पर कोई सीधा बयान देने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार के अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नए इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगा दी थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग से सामाजिक अस्थिरता पैदा होने की संभावना है।
त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी किया है। ऐसे में इस पर किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। हालांकि हमारी पार्टी का मानना है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
वहीं विपक्षी दलों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक टकराव के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है। समाजवादी पार्टी, बसपा और तृणमूल कांग्रेस के नेता भी कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए इसे न्यायोचित करार दिया।
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूजीसी के नए नियमों ने सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी, और ऐसे हालात में सुप्रीम कोर्ट का रोक आदेश उचित है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूजीसी नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेता और सामान्य वर्ग का भी प्रतिनिधित्व जांच समिति में शामिल होता, तो सामाजिक असहमति पैदा नहीं होती। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी न्यायालय के फैसले का स्वागत किया।
इसके साथ ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन ने न्यायाधीशों के आदेश पर आपत्ति जताई है, लेकिन अन्य विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से सकारात्मक कदम बताया है।