कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी सांसदों के साथ हुई कार्रवाई की तीखी आलोचना की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला और अस्वीकार्य व्यवहार करार दिया।

इस दिन सुबह तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों को हिरासत में लिया गया, जब वे केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित अनुचित इस्तेमाल के खिलाफ विरोध जता रहे थे। ममता बनर्जी ने इसे ‘वर्दी में अहंकार’ बताते हुए कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने पर सड़कों पर घसीटना कानून का पालन नहीं बल्कि सत्ता का दुरुपयोग है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत एक लोकतंत्र है, किसी एक राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं। उन्होंने भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां उनके नेता विरोध प्रदर्शनों के दौरान विशेष सुविधाओं की उम्मीद करते हैं, वहीं विपक्षी सांसदों को आवाज उठाने पर अपमानित किया जाता है और हिरासत में लिया जाता है।

ममता ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र केवल सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम के लिए नहीं होता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संस्थाओं और नेताओं के बीच परस्पर सम्मान होना चाहिए। चुने हुए प्रतिनिधियों के अपमान का जवाब हमेशा सहिष्णुता, असहमति और लोकतांत्रिक नैतिकता से दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कोई भी सरकार, कोई भी पार्टी या गृह मंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में कौन सम्मान का हकदार है।