पिछले दस दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि महंगाई के इस बोझ का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जबकि सरकार तेल कंपनियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
कांग्रेस ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज़ी से इजाफा हुआ है। पार्टी ने लिखा कि “पिछले 9 दिनों में पेट्रोल-डीजल करीब 5 रुपये महंगा हो गया है। आज फिर पेट्रोल में लगभग 94 पैसे और डीजल में 95 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। सरकार आम जनता को राहत देने के बजाय तेल कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।”
पार्टी ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, “आखिर कब तक आम लोगों की अनदेखी कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जाता रहेगा?”
वहीं तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़े हैं और हर कुछ दिनों में लगभग एक रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर मुद्रा और आर्थिक दबाव का खामियाजा सीधे जनता को भुगतना पड़ रहा है।
गोखले ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि सरकार के खर्चों में कटौती के दिखावे की बजाय देश को ऐसी आर्थिक नीति की जरूरत है जो वास्तविक प्रशासनिक सुधार और अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रबंधन पर केंद्रित हो।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। इस ताजा बदलाव के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। इससे पहले 15 मई को भी करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 19 मई को भी 80 पैसे से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई थी।