दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने अपने पुडुचेरी दौरे के दौरान 2700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पुडुचेरी आना उनके लिए गर्व का विषय है, क्योंकि यह संतों, कवियों और स्वतंत्रता सेनानियों की ऐतिहासिक भूमि रही है। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी धरती से राष्ट्रवाद की चेतना को नई दिशा मिली थी।

‘BEST पुडुचेरी’ विजन की चर्चा

प्रधानमंत्री ने अपने पूर्व दौरे का जिक्र करते हुए ‘BEST पुडुचेरी’ विजन को दोहराया, जिसका आशय बिजनेस, एजुकेशन, स्पिरिचुअलिटी और टूरिज्म से है। उन्होंने कहा कि बीते साढ़े चार वर्षों में इस सोच के सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना था कि जब केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश समान लक्ष्य के साथ काम करते हैं, तो विकास की रफ्तार तेज होती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस वर्ष देश में आधारभूत ढांचे के लिए रिकॉर्ड 12 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार, इससे बेहतर सड़क नेटवर्क, पेयजल व्यवस्था, तटीय ढांचे, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पुडुचेरी को कैपिटल इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत विशेष वित्तीय सहयोग दिया गया है, जिससे स्थानीय परियोजनाओं को गति मिलेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

दौरे के दौरान राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कराईकल में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग ब्लॉक और आधुनिक अस्पताल सुविधाओं का उल्लेख किया गया। साथ ही पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुनियादी ढांचे के विस्तार की जानकारी भी साझा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

इलेक्ट्रिक बसों पर जोर

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ और हरित परिवहन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पर्यटन केंद्र होने के कारण पुडुचेरी में इलेक्ट्रिक बसें प्रदूषण घटाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। पीएम ई-बस सेवा के तहत नई बसें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा आवास योजनाओं के माध्यम से परिवारों को स्थायित्व और बेहतर जीवन स्तर देने की बात भी कही गई।

विपक्ष पर टिप्पणी

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले के वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण विकास प्रभावित हुआ। वर्तमान व्यवस्था को उन्होंने “डबल इंजन सरकार” बताते हुए कहा कि अब स्थिरता और पारदर्शिता के साथ काम किया जा रहा है।