केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच मनरेगा को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह 10 जनवरी से 25 फरवरी तक पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाएगी। पार्टी का कहना है कि नए वीबी-जी राम-जी एक्ट के माध्यम से ग्रामीण रोजगार की गारंटी खत्म की जा रही है, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। कांग्रेस ने इस कानून को गरीब और मजदूर विरोधी करार दिया है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस नए कानून से रोजगार अब अधिकार नहीं रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को अधिकार आधारित कानून से हटाकर पूरी तरह से केंद्रीकृत योजना में बदलना चाहती है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह कानून अदालत में भी चुनौती दी जाएगी।
पंचायतों के अधिकार पर असर
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नए एक्ट से पंचायतों की भूमिका कमजोर हो जाएगी। मनरेगा के तहत गांव स्तर पर काम, मजदूरी और योजना बनाने का अधिकार पंचायतों को था, लेकिन अब इसे केंद्र के नियंत्रण में लाया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि इससे ग्रामीण मजदूरों को समय पर काम और भुगतान मिलने में समस्याएं बढ़ेंगी।
इंडी गठबंधन से बातचीत
जब सवाल किया गया कि क्या इंडी गठबंधन शासित राज्य इस कानून को लागू नहीं करेंगे, तो के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सभी सहयोगी दलों से बातचीत की जाएगी। कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि साझा रणनीति के तहत इस कानून का राजनीतिक और कानूनी विरोध किया जाए।
नया कानून कैसे बना?
विक्सित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन बिल यानी वीबी-जी राम-जी एक्ट 18 दिसंबर को राज्यसभा में हंगामे के बीच पास हुआ। 21 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया। नए कानून में मौजूदा मनरेगा की जगह लेने का प्रावधान है और इसमें प्रति ग्रामीण परिवार 125 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है।