पश्चिम बंगाल भाजपा में दिलीप घोष का नाम फिर सुर्खियों में है। कोलकाता के ईको पार्क की सुबह की सैर, न्यू टाउन स्थित उनके आवास पर बढ़ती भीड़ और लगातार बजते फोन इस बात का संकेत हैं कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की सियासी प्रासंगिकता लौट आई है। पार्टी के अंदर अब यह अनुमान तेज हो गया है कि दिलीप घोष केवल औपचारिक वापसी नहीं कर रहे, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले लंबी राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी में हैं

राजनीतिक ‘वनवास’ से सक्रिय राजनीति तक

पिछले कुछ वर्षों में दिलीप घोष पार्टी में मौजूद थे, लेकिन सक्रिय रूप से दिखाई नहीं देते थे। उन्हें सुरक्षा और संसाधन मिले हुए थे, लेकिन प्रधानमंत्री की बंगाल रैलियों और बड़े संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी नहीं थी। पार्टी के भीतर उनकी भूमिका भी लगभग सीमित कर दी गई थी। इस दौरान घोष कहते रहे, “मैं पार्टी में हूँ, कहीं गया नहीं।”

अमित शाह की बैठक ने बदला समीकरण

31 दिसंबर को स्थिति बदल गई, जब दिलीप घोष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बैठक में शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, उन्हें केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल के जरिए न्योता मिला। यह संदेश था कि उनकी सक्रिय भूमिका की बारी आ गई है। इसके बाद फोन फिर बजने लगे और उनके पुराने समर्थक सक्रिय हो गए।

भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा

भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष के मुताबिक, “2016 से 2021 के बीच पार्टी का जो जोश था, वह दिलीप घोष की वजह से था। 2021 की हिंसा और उनके हाशिये पर जाने के बाद कई कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर गया था। अब उनकी वापसी से वही तबका फिर सक्रिय हो रहा है।” उनके कार्यकाल में भाजपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया।

बिना पद के भी मजबूत पकड़

हालांकि दिलीप घोष फिलहाल किसी औपचारिक पद पर नहीं हैं, लेकिन वे रोज कई घंटे पार्टी कार्यालय में बिताते हैं। उनके लिए विधाननगर कार्यालय में एक अलग कक्ष तय किया गया है, ताकि नेताओं और कार्यकर्ताओं की मुलाकात सुगम हो सके।

2026 चुनाव और नेतृत्व संतुलन

पार्टी के अंदर उनके रोल को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। एक धड़ा मानता है कि उन्हें 2026 विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत उम्मीदवार के तौर पर तैयार किया जा रहा है। दूसरा मानता है कि यह कदम विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी के इर्द-गिर्द ‘एक-नेता’ छवि को संतुलित करने के लिए है। दोनों नेता जनाधार वाले हैं और वोट खींचने की क्षमता रखते हैं।

पहले से ज्यादा परिपक्व

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य के अनुसार, अब दिलीप घोष ने रणनीति तैयार कर ली है और वे मैदान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, “पहले वाला दिलीप अब नहीं रहा; अब वे अधिक परिपक्व और रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”

चुनावी साल में अहम योगदान

2021 की हार और संगठनात्मक थकान से जूझ रही पार्टी के लिए दिलीप घोष की वापसी मनोरबल बढ़ाने वाला कदम है। उनकी मौजूदगी संगठन को फिर सक्रिय बनाएगी और संकेत साफ हैं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह सिर्फ यादों की राजनीति नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक वापसी है।