भुवनेश्वर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के सात राज्यों में 26 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह अभियान ईडी के पणजी ज़ोनल कार्यालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत चलाया गया।

ईडी की यह कार्रवाई मामला ईसीआइआर/पीजेजेडओ/02/2025 (मधुपन सुरेश ससिकला एवं अन्य) के तहत की गई है। इस मामले की शुरुआत गोवा पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से हुई, जिसमें एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मादक पदार्थों की वाणिज्यिक तस्करी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सात राज्यों में समन्वित छापेमारी

ईडी ने गोवा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और दिल्ली में एक साथ अभियान चलाया। प्रारंभिक जांच में एक संगठित अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

बी2बी मॉडल के माध्यम से ड्रग सप्लाई

जांच में यह भी सामने आया कि मादक पदार्थों की आपूर्ति बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) तरीके से की जा रही थी। नेटवर्क गोवा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और केरल तक फैला हुआ था।

नकदी, ड्रग्स और डिजिटल सबूत जब्त

छापेमारी के दौरान ईडी ने भारी मात्रा में नकदी, चरस सहित अन्य मादक पदार्थ, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए।

डिजिटल जांच में बड़े खुलासे

जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल में पता चला कि एमडीएमए, एक्स्टेसी, हैश, कुश, शरूम्स, राशोल क्रीम, कोकीन और सुपर क्रीम जैसी ड्रग्स की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की जा रही थी। मादक पदार्थों की ढुलाई के लिए कूरियर और डाक सेवाओं का इस्तेमाल भी किया जा रहा था।

जांच में यह भी पता चला कि अपराधी अपनी कमाई को UPI, बैंक ट्रांसफर, क्रिप्टोकरेंसी और नकद लेन-देन के जरिए छिपा रहे थे। जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिये धन को कई परतों में घुमाने की योजना बनाई गई थी।

अन्य एजेंसियों के साथ साझा की जाएगी जानकारी

ईडी ने कहा कि जांच में मिली जानकारियां अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की जा रही हैं, ताकि आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि वह संगठित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने और अवैध धन के घुमाव वाले रास्तों को बंद करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।