नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ठोस कचरा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब कचरे को घर और संस्थाओं से ही चार अलग-अलग श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को बताया कि ये नियम 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होंगे।
चार श्रेणियों में कचरा अलग करना जरूरी
नए नियमों के अनुसार ठोस कचरे को चार श्रेणियों में अलग किया जाएगा: गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा। सरकार का कहना है कि इससे कचरे के वैज्ञानिक निपटान में मदद मिलेगी और शहरी निकायों पर बोझ कम होगा।
बड़े कचरा उत्पादकों पर सख्ती
संस्थानों और निकायों की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है। जिन संस्थाओं का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, या जो प्रतिदिन 40,000 लीटर से ज्यादा पानी का उपयोग करते हैं, या रोजाना 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें ‘बल्क वेस्ट जेनरेटर’ माना जाएगा। इसमें सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, शैक्षणिक संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बड़े आवासीय परिसर शामिल हैं। इन संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कचरे का संग्रह, परिवहन और निस्तारण पर्यावरण अनुकूल तरीके से हो।
लाभ और व्यवस्था
सरकार का कहना है कि नए नियमों से कचरा प्रबंधन को विकेंद्रीकृत किया जा सकेगा और नगर निगमों पर निर्भरता घटेगी। स्थानीय निकाय अब कचरा उत्पन्न करने वालों से यूजर फीस वसूल सकते हैं। नियमों में सर्कुलर इकोनॉमी और ईपीआर (Extended Producer Responsibility) के सिद्धांतों को शामिल किया गया है, ताकि कचरे का पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय संरक्षण बेहतर हो।
उल्लंघन पर जुर्माना
नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई होगी। बिना पंजीकरण, गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या कचरे के अनुचित प्रबंधन की स्थिति में ‘प्रदूषक भुगतान करे’ सिद्धांत के तहत पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाएगा। इसके लिए दिशा-निर्देश केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तैयार करेगा, जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित समितियां मुआवजा लगाने की जिम्मेदारी निभाएंगी।
कचरे की श्रेणियाँ और प्रबंधन
गीला कचरा: रसोई का कचरा, फल-फूल के छिलके, बचा हुआ खाना आदि। इसे कंपोस्टिंग या बायो-प्रोसेसिंग के जरिए निस्तारित किया जाएगा।
सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी आदि। इसे मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी में भेजकर रीसाइक्लिंग या पुनः उपयोग किया जाएगा।
सैनिटरी कचरा: इस्तेमाल किए गए डायपर, नैपकिन, मास्क, टिश्यू आदि। इनका सुरक्षित संग्रह और निपटान किया जाएगा।
विशेष देखभाल कचरा: पेंट के डिब्बे, बल्ब, बैटरियां, एक्सपायर्ड दवाइयां आदि। इसे केवल अधिकृत एजेंसियां या तय कलेक्शन सेंटर ही संभालेंगी।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह कदम न केवल शहरों की स्वच्छता बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कचरे के पुनर्चक्रण को भी मजबूत करेगा।