ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के बाद भारत ने क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव बढ़ाने से बचने की अपील की।
विदेश मंत्रालय की चेतावनी
बयान में कहा गया कि स्थिति को संभालने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंत्रालय ने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया। साथ ही, खाड़ी और ईरान में स्थित भारतीय मिशन अपने नागरिकों के संपर्क में हैं और आवश्यक सुरक्षा सलाह जारी कर रहे हैं। नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने और मिशनों से जुड़े रहने को कहा गया है।
भारत के लिए संभावित चुनौतियां
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान पर हमलों का प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है। लंबी लड़ाई से भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और खाड़ी में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कच्चे तेल की महत्वपूर्ण जरूरतें ईरान के पड़ोसी देशों से पूरी करता है, जिसमें करीब 40 से 60 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। किसी भी सैन्य अवरोध से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं, खाड़ी देशों में रहने वाले 80 लाख से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षा और आपातकालीन निकासी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।