ओडिशा के बालेश्वर जिले स्थित चांदीपुर तट पर भारत ने शुक्रवार को लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-ASHM) का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण को देश की समुद्री रक्षा क्षमता के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस हाइपरसोनिक मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है। परीक्षण सफल रहने के बाद भारत की नौसेना सुरक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और भारतीय नौसेना को बधाई दी है।
इस मिसाइल को भविष्य में भारतीय समुद्री तटों पर तैनात किए जाने की योजना है, जिससे दूर स्थित दुश्मन के युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर को भी आसानी से निशाना बनाया जा सकेगा। इसकी खासियत यह है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए तेजी से दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना या ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
वर्तमान वैश्विक समुद्री परिस्थितियों और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए इस परीक्षण को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
यह मिसाइल भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसकी सटीकता और विश्वसनीयता को बढ़ाते हैं।
तकनीकी रूप से यह मिसाइल प्रारंभिक चरण में अत्यधिक गति हासिल करती है और बाद में नियंत्रित ग्लाइड मोड में उड़ान भरते हुए लक्ष्य को भेदने में सक्षम होती है। परीक्षण के दौरान इसने करीब 1500 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को सटीकता से हिट कर अपनी क्षमता साबित की।
इस उपलब्धि के साथ भारत हाइपरसोनिक तकनीक रखने वाले चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूत स्थिति में पहुंच गया है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी सामरिक ताकत को भी बढ़ावा मिला है।