चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत प्रकाशित हालिया मसौदा मतदाता सूचियों में करीब 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। एसआईआर के दूसरे चरण से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 50.90 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। अलग-अलग मसौदा सूची जारी होने के बाद यह संख्या घटकर 44.40 करोड़ रह गई। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि हटाए गए नाम मुख्य रूप से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट रिकॉर्ड वाले मतदाताओं के हैं।
उत्तर प्रदेश में 18.70% मतदाता सूची से हटाए गए
उत्तर प्रदेश में एसआईआर के बाद मंगलवार को जारी ड्राफ्ट सूची में कुल 15.44 करोड़ में से 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम नहीं रह गए। यह आंकड़ा कुल पंजीकृत मतदाताओं का 18.70 प्रतिशत है। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में गणना फॉर्मों का संग्रह कम हुआ।
जिला स्तर पर कटौती का विवरण
सहारनपुर में 4,32,534 (16.37%) नाम, मेरठ में 6,65,635 (24.65%) नाम, गाजियाबाद में 8,18,139 (28.83%) नाम, और लखनऊ में 12,00,138 (30.04%) नाम हटाए गए। इसी तरह अन्य जिलों में भी मतदाता सूची से हजारों नाम बाहर किए गए हैं।
एसआईआर का उद्देश्य और भविष्य की प्रक्रिया
एसआईआर का मुख्य उद्देश्य जन्मस्थान और निवास के आधार पर अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाना है। यह प्रक्रिया बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ राज्यों में चल रहे कदमों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एसआईआर का दूसरा चरण 4 नवंबर से अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ। असम में मतदाता सूची के लिए अलग विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्यों में आखिरी एसआईआर को कट-ऑफ तारीख माना जाएगा।