नई दिल्ली। मणिपुर के बाद मेघालय के गारो हिल्स जिले भी हिंसा की चपेट में आ गए हैं। कुछ दिनों पहले हुई झड़पों के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है, जिसके चलते प्रशासन ने कर्फ्यू लगाया और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही गारो हिल्स में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं और लोकल काउंसिल चुनावों को भी स्थगित कर दिया गया है।
हिंसा का कारण
हिंसा की शुरुआत गारो हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (GHADC) के चुनाव को लेकर हुई। आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों के बीच मतदाता सूची और नामांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया। सोमवार को पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर कथित हमला हुआ, जब वह चुनाव नामांकन के लिए तूर में डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे। इसके बाद मंगलवार को झड़पें और बढ़ गईं और पुलिस फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई।
कर्फ्यू और सेना की तैनाती
पुलिस फायरिंग के बाद इलाके में तनाव फैल गया। प्रशासन ने गारो हिल्स के पांच जिलों—वेस्ट, ईस्ट, नॉर्थ, साउथ और साउथ-वेस्ट गारो हिल्स—में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया। इसके अलावा कर्फ्यू भी लगाया गया, जो अब 13 मार्च तक लागू रहेगा।
सेना की 5 टुकड़ियां तैनात की गई हैं, जिनमें से 3 तूर में और 2 चबिनंग में हैं। इसके अलावा, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अतिरिक्त राज्य पुलिस बल संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैदी से तैनात हैं।
CM संगमा का बयान
सीएम कोनराड संगमा को सुरक्षा कारणों से दूसरी जगह जाने की सलाह दी गई, लेकिन उन्होंने कहा कि वह वहीं रहेंगे और शांति बनाए रखने की अपील की। संगमा ने कहा, “मेरे घर और परिवार पर भीड़ की धमकियों के बावजूद मैं डरने वाला नहीं हूँ और यहां से नहीं जाऊँगा।”
चुनाव और परीक्षाओं पर असर
हिंसा के चलते 10 अप्रैल को होने वाले GHADC चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं। इसके अलावा, 11 और 12 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाएं भी रोक दी गई हैं।
विवाद की वजह
गौरतलब है कि गारो हिल्स में लोकल काउंसिल चुनाव गारो जनजाति के प्रतिनिधि चुनने के लिए होते हैं। हालांकि, गैर-आदिवासी मतदाताओं को शामिल करने पर विवाद उत्पन्न हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गैर-आदिवासियों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।