बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रक्षा क्षेत्र में तकनीकी उन्नयन, घरेलू उत्पादन और निर्यात बढ़ाने को लेकर सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और सैन्य नेतृत्व लगातार रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में देश की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामथ और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में भारत की रक्षा नीति, भविष्य की जरूरतों और तकनीकी विकास पर व्यापक मंथन किया गया।

2029 तक 50 हजार करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत तेजी से रक्षा निर्यात में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को पार करने की पूरी संभावना है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भारत का रक्षा निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो पिछले साल की तुलना में 61 प्रतिशत अधिक है। एशिया और अफ्रीका के कई देश भारतीय रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखा रहे हैं, जबकि यूरोपीय देश भी तकनीकी सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं।

मिसाइल क्षमता और रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार

राजेश कुमार सिंह ने कहा कि बदलते सुरक्षा हालात, खासकर पश्चिम एशिया और पाकिस्तान से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए भारत को अपनी पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।

उन्होंने बताया कि सरकार तेज़ खरीद प्रक्रिया, वायु रक्षा प्रणाली और उन्नत हथियारों के विकास पर जोर दे रही है। साथ ही ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ जैसी योजनाओं पर भी काम चल रहा है।

स्वदेशी लड़ाकू विमान और नई पीढ़ी की तकनीक

रक्षा सचिव ने बताया कि उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) परियोजना पर काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और जल्द ही निजी क्षेत्र को प्रस्ताव आमंत्रित किया जाएगा।

भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की भी तलाश कर रहा है। वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए रिफ्यूलर, अवाक्स और अन्य सिस्टम में मौजूद अंतर को भी जल्द भरा जाएगा।

हाइपरसोनिक मिसाइल और डीआरडीओ की प्रगति

डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामथ ने बताया कि भारत का हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम उन्नत चरण में है और जल्द ही इसके परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज दोनों तरह की मिसाइल तकनीक पर काम कर रहा है। इसके अलावा ‘प्रलय’ मिसाइल परीक्षण के अंतिम चरण में है और अग्नि-VI परियोजना पर अंतिम निर्णय सरकार लेगी।

राजनाथ सिंह का बयान: ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी रणनीति और शर्तों के अनुसार रोका था और उस समय देश पूरी तरह लंबे सैन्य अभियान के लिए तैयार था।

उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आतंकवाद की जड़ों को समाप्त करना आवश्यक है।