महाराष्ट्र निकाय चुनाव प्रचार में व्यस्त एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का हिजाब पहनी बेटी को प्रधानमंत्री बनाने वाला बयान अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। रविवार को नागपुर में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखी टिप्पणी की।

ओवैसी ने कहा कि सरमा की सोच ‘छोटी’ है और उनके दिमाग में ‘ट्यूबलाइट’ जल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार देता है, जबकि पाकिस्तान के संविधान में किसी एक समुदाय को ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने का अधिकार है। ओवैसी ने बाबासाहेब अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि संविधान और उसकी भावना को न समझने वाले लोग ऐसी सीमित सोच रखते हैं।

दरअसल, असम सीएम ने शनिवार को गुवाहाटी में ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि संवैधानिक रूप से कोई बाधा नहीं है, लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र है और उनका मानना है कि प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही होगा।

ओवैसी ने 9 जनवरी को सोलापुर में एक जनसभा में कहा था कि एक दिन हिजाब पहनी उनकी बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। उन्होंने पाकिस्तान और भारत के संविधान में अंतर बताते हुए कहा कि भारत में किसी भी नागरिक को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बनने का अधिकार है।

इसी बीच छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने ओवैसी के बयान पर पलटवार किया और कहा कि उनकी राजनीति हमेशा धार्मिक और भावनात्मक आधार पर रहती है।

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने भी इस बयान पर टिप्पणी की और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में पहले भी अब्दुल कलाम राष्ट्रपति और हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति बने। उन्होंने कहा कि अगर कभी महिला प्रधानमंत्री बनती है, तो वह साड़ी में ही बनेगी।