हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ गई है। रेड फोर्ट इलाके में हुए आतंकी धमाके की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एजेंसी इस कैंपस को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत अटैच करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को इसकी पुष्टि की।
निर्माण कार्य में अवैध धन के इस्तेमाल की आशंका
ईडी इस बात की पड़ताल कर रही है कि यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में लगाए गए फंड कहीं आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन तो नहीं हैं। एजेंसी को शक है कि कथित तौर पर अवैध तरीके से जुटाई गई रकम को फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित कैंपस के निर्माण में लगाया गया।
चेयरमैन पहले से न्यायिक हिरासत में
अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने नवंबर में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का दावा है कि अल-फलाह ट्रस्ट से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों ने जरूरी मान्यता और मानकों के बिना छात्रों को दाखिले दिए और उनसे मोटी फीस वसूली।
₹415 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई का आरोप
ईडी ने अदालत में दलील दी है कि सिद्दीकी के निर्देश पर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट ने फर्जी मान्यता और भ्रामक दावों के जरिए छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर करीब ₹415.10 करोड़ की अवैध आय अर्जित की।
संपत्तियों की पहचान और मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू
सूत्रों के अनुसार, ईडी अल-फलाह ट्रस्ट से जुड़ी चल-अचल संपत्तियों की पहचान और उनका मूल्यांकन कर रही है। जांच पूरी होने के बाद, अवैध धन से अर्जित या निर्मित संपत्तियों को पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया जा सकता है।
छात्रों की पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा
एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि कैंपस को अटैच किया जाता है, तब भी छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर सरकार की ओर से नियुक्त रिसीवर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कामकाज की निगरानी कर सकता है।
दिल्ली में जमीन खरीद से जुड़े फर्जी दस्तावेजों की भी जांच
ईडी दिल्ली में जमीन खरीद से संबंधित कम से कम पांच मामलों की जांच कर रही है, जिनमें जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) से जुड़े दस्तावेजों के कथित रूप से फर्जी होने का आरोप है। बताया जा रहा है कि ये दस्तावेज सिद्दीकी से जुड़े ट्रस्ट के इशारे पर तैयार किए गए।
आतंकी मॉड्यूल जांच में सामने आया यूनिवर्सिटी का नाम
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम उस तथाकथित ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन डॉक्टरों सहित 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।
रेड फोर्ट धमाके का आरोपी डॉक्टर यूनिवर्सिटी से जुड़ा
अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ा डॉक्टर उमर-उन-नबी 10 नवंबर को रेड फोर्ट के बाहर हुए कार बम धमाके का आत्मघाती हमलावर बताया गया है। इस हमले में 15 लोगों की जान गई थी।
दो एफआईआर के आधार पर दर्ज हुआ पीएमएलए मामला
ईडी ने 14 नवंबर को दिल्ली पुलिस की दो एफआईआर के आधार पर अल-फलाह ग्रुप और जवाद सिद्दीकी के खिलाफ पीएमएलए के तहत केस दर्ज किया था।
यूजीसी और एनएएसी मान्यता को लेकर भ्रामक दावे
एजेंसी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने खुद को यूजीसी से मान्यता प्राप्त बताकर और एनएएसी ग्रेड को लेकर गलत जानकारियां देकर छात्रों को गुमराह किया।
सिद्दीकी की ओर से आरोपों से इनकार
वहीं, जवाद सिद्दीकी के वकील ने अदालत में दलील दी है कि उनके मुवक्किल को झूठे और मनगढ़ंत मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस की एफआईआर का कोई ठोस आधार नहीं है।