प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर से जुड़े गौरवपूर्ण इतिहास को याद करते हुए कई अहम प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि 31 अक्तूबर 2001 को वे सोमनाथ में आयोजित उस कार्यक्रम का हिस्सा बने थे, जिसमें वर्ष 1951 में पुनर्निर्मित मंदिर की स्वर्ण जयंती मनाई गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1951 में हुआ यह ऐतिहासिक आयोजन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में संपन्न हुआ था।

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में योगदान देने वाले महान नेताओं को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल, के. एम. मुंशी सहित अनेक विभूतियों का योगदान इस पुनरुद्धार में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। मोदी ने यह भी बताया कि वर्ष 2001 के समारोह में उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में प्रधानमंत्री ने “जय सोमनाथ” के उद्घोष के साथ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला आक्रमण हुआ था, लेकिन इसके बाद भी हुए अनेक हमले देशवासियों की आस्था और उस सांस्कृतिक चेतना को नहीं डिगा सके, जिसने सोमनाथ को बार-बार पुनः खड़ा किया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 में मंदिर के आधुनिक पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। इसी क्रम में उन्होंने अपनी पिछली सोमनाथ यात्राओं की तस्वीरें साझा कीं और श्रद्धालुओं से अपील की कि जो लोग सोमनाथ दर्शन कर चुके हैं, वे भी अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ साझा करें।

सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास और उसके पुनरुत्थान की यात्रा को रेखांकित करने के उद्देश्य से 8 से 11 जनवरी तक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। विध्वंस से पुनर्जागरण तक करीब एक हजार वर्षों के संघर्ष और आस्था की इस गाथा को इस पर्व के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है। 11 जनवरी को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी संभावना है।

वर्ष 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर की आधुनिक प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी, और वर्ष 2026 इस ऐतिहासिक उपलब्धि की 75वीं वर्षगांठ के कारण विशेष महत्व रखता है।