10 बार के राष्ट्रीय चैंपियन बाबा बलविंदर सिंह ने दुनिया को कहा अलविदा

HIGHLIGHTS
- भारतीय एथलेटिक्स के प्रसिद्ध खिलाड़ी, अर्जुन पुरस्कार विजेता और पूर्व राष्ट्रीय शॉटपुट चैंपियन बाबा बलविंदर सिंह धालीवाल का अचानक निधन हो गया।
- उनके निधन की खबर से खेल जगत, पंजाब विश्वविद्यालय और खेल प्रेमियों में गहरा शोक व्याप्त है।
- वे चंडीगढ़ के सेक्टर-39 में निवास करते थे।
- बाबा बलविंदर सिंह धालीवाल भारतीय एथलेटिक्स इतिहास के उन दिग्गज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने शॉटपुट स्पर्धा में अपने प्रदर्शन से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
- वर्ष 1981 से 1992 तक लगातार…
चंडीगढ़। भारतीय एथलेटिक्स के प्रसिद्ध खिलाड़ी, अर्जुन पुरस्कार विजेता और पूर्व राष्ट्रीय शॉटपुट चैंपियन बाबा बलविंदर सिंह धालीवाल का अचानक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से खेल जगत, पंजाब विश्वविद्यालय और खेल प्रेमियों में गहरा शोक व्याप्त है। वे चंडीगढ़ के सेक्टर-39 में निवास करते थे।
बाबा बलविंदर सिंह धालीवाल भारतीय एथलेटिक्स इतिहास के उन दिग्गज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने शॉटपुट स्पर्धा में अपने प्रदर्शन से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। वर्ष 1981 से 1992 तक लगातार 10 वर्षों तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहना उनकी असाधारण प्रतिभा, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए वर्ष 1983 में उन्हें पंजाब सरकार के सर्वोच्च खेल सम्मान महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद 1987 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार प्रदान कर उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने भारत का नाम रोशन किया। वर्ष 1985 के एथलेटिक्स विश्व कप के एशियाई वर्ग में उन्होंने छठा स्थान हासिल किया। 1986 में 18.88 मीटर के शानदार थ्रो के लिए उन्हें एशियाई महाद्वीपीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियों को 1988 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था।
खेल उपलब्धियों के साथ-साथ बाबा बलविंदर सिंह धालीवाल अपनी सादगी और मार्गदर्शन के लिए भी जाने जाते थे। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में कोच के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और विश्वविद्यालय खेलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका जीवन खेल, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक माना जाता रहा है। उनके निधन को भारतीय एथलेटिक्स के एक स्वर्णिम दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है। खेल जगत ने इसे अपूरणीय क्षति बताया है।
परिवार के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 3 जून 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा।
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